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पोषण की कमी से रुक रहा मानसिक व शारीरिक विकास

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उन्नाव। जिले में जन्म से पांच वर्ष तक की उम्र के 46.5 फीसदी बच्चों में पोषण की कमी पाई गई है। इससे उनका शारीरिक व मानसिक विकास रुक रहा है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 4 की रिपोर्ट के अनुसार जिले में पांच वर्ष तक की उम्र के 46.5 फीसदी बच्चों की लंबाई उनकी आयु के अनुपात में कम है।
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बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए शुरू के 1000 दिन यानी गर्भकाल के 270 दिन और बच्चे के जन्म के दो साल बाद तक का समय बहुत ही महत्वपूर्ण होता है । इस दौरान पोषण का खास ख्याल रखना बहुत ही जरूरी है। उचित पोषण न मिलने से स्वास्थ्यगत नुकसान पूरे जीवन चक्र को प्रभावित कर सकता है। जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डा. बृजकुमार के अनुसार स्तनपान के साथ-साथ 6-8 माह की आयु के बच्चों को 250-250 मिली की आधी-आधी कटोरी अर्द्धठोस आहार, दिन में 2 बार देना चाहिए। 9-11 माह के बच्चे को स्तनपान के साथ-साथ 250-250 मिली की आधी-आधी कटोरी दिन में तीन बार देनी चाहिए। 11 से 23 माह के बच्चे को भी स्तनपान के साथ 250-250 मिली मिली की पूरी कटोरी दिन में तीन बार देनी चाहिये और साथ में 1-2 बार नाश्ता भी खिलाएं। अभिभावक इस बात पर अधिक ध्यान दें कि बच्चे को तरल आहार न देकर अर्द्ध ठोस पदार्थ देने चाहिए। इसके अलावा भोजन में चतुरंगी आहार (लाल, सफेद, हरा व पीला) जैसे गाढ़ी दाल, अनाज, हरी पत्तेदार सब्जियां स्थानीय मौसमी फल और दूध व दूध से बने उत्पादों को भी खिलाना चाहिए। जिससे बच्चों को शारीरिक व मानसिक विकास के लिए जरूरी पोषण मिल सके।

क्या कहती है रिपोर्ट
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 4 की रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में 6-23 माह के 5.3 प्रतिशत बच्चों को ही पर्याप्त आहार मिल पाता है। 5 वर्ष तक के 46.3 प्रतिशत ऐसे बच्चे हैं जिनकी लंबाई, उनकी आयु के अनुपात में कम है। उन्नाव जिले में 13.1 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं जिनका वजन उनकी लंबाई के अनुपात में कम है तथा 2.6 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं जिनका वजन उनकी लंबाई के अनुपात में बहुत कम है। इसी तरह 34.3 प्रतिशत बच्चे कम वजन के हैं।
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पोषण की जानकारी देने के लिए अन्नप्राशन दिवस का ले रहे सहारा
अभिभावकों को बच्चों को दी जाने वाली खुराक की बेहतर जानकारी आंगनबाड़ी सेंटर पर दी जा रही है। यहां बचपन व अन्नप्राशन दिवस का आयोजन किया जाता है। जिसमें बच्चा 6 माह की आयु पूरी होने पर पहली बार अन्न चखता है। इस दौरान मां व परिवार वालों को पोषण, स्वच्छता एवं पुष्टाहार आदि की जानकारी दी जाती है।
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-46.5 फीसदी बच्चों की लंबाई आयु के अनुपात में कम मिली
-राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण की रिपोर्ट में हुआ खुलासा
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