महिलाओं के शिकायत की सुनवाई में सहूलियत और त्वरित कार्रवाई के लिए थानों में बने हेल्प डेस्कों पर अब सन्नाटा पसर गया है। हेल्प डेस्क पर महिला फरियादियों की संख्या में काफी कमी आई है। दिन भर कर्मचारी आवेदनों का इंतजार करती रहती हैं। पुलिस इसे अपनी चुस्त कार्यप्रणाली का असर बता रही है। पुलिस के अफसरों का दावा है कि महिला उत्पीड़न के मामलों में प्रभावी कार्रवाई के चलते शिकायतों में कमी आई है। हालांकि दूसरा तथ्य यह भी है कि हेल्प डेस्क की बजाय पुलिस 112 या अन्य माध्यमों से आने वाली शिकायतों को सामान्य रूप से दर्ज कर उसी रूप में कार्रवाई करती है। महिलाओं में हेल्प डेस्क के प्रति जागरुकता न होना भी एक वजह है। जिले के विभिन्न थानों में पिछले तीन माह के दौरान आए मामलों की पड़ताल में कमोवेश ऐसी ही स्थिति नजर आई।
अनपरा: तीन पर आ रही एक शिकायत
अनपरा थाने में स्थापित हेल्प डेस्क पर पिछले तीन माह में कुल 39 मामले ही पहुंचे। इसमें थाने की ओर से सभी मामलों का निस्तारण कर दिया गया। कुल 39 मामलों में एनसीआर के पांच, एफआईआर के दो, शांतिभंग में एक, सुलहनामा के 27 व तीन पर अन्य कार्रवाई की गई। चौकी प्रभारी रेणुसागर ने बताया कि शासन की मंशानुरूप महिलाओं को हेल्प डेस्क के प्रति लगातार जागरूक किया जाता है। थाने पर भी महिलाओं से जुड़े वादों को प्राथमिकता दी जाती है। समस्याओं के त्वरित निस्तारण का प्रयास किया जाता है। पिछले तीन माह में आए सभी मामलों का निस्तारण किया गया और आवश्यक मामलों पर त्वरित कार्रवाई भी की गई।
घोरावल: तीन माह में आए 18 मामले
घोरावल कोतवाली में सृजित महिला हेल्प डेस्क पर बीते तीन महीनों में कुल 18 मामले आए। इनमें से सभी मामलों में पुलिस ने कार्रवाई की है। प्रभारी निरीक्षक देवतानंद सिंह ने बताया कि जनवरी, फरवरी, मार्च में कुल मिलाकर 18 मामले महिला हेल्प डेस्क पर आए। इन मामलों में ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में महिलाओं के साथ मारपीट, पारिवारिक विवाद जैसे पति पत्नी,भाई भाई में विवाद या मारपीट, अपहरण, गैंगरेप, दुष्कर्म, छेड़खानी पास्को एक्ट इत्यादि से संबंधित मामले शामिल हैं। इन सभी मामलों में मुकदमा दर्ज करते हुए त्वरित प्रभावी कार्रवाई की गई।