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अब बचे हैं बस पांच दिन, स्वच्छता पर फीडबैक में न रहें उदासीन

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नगर में साफ-सफाई की दशा किसी से छिपी नहीं है। इसके बावजूद स्वच्छता के मामले में नगर को अव्वल बनाने में किसी की रुचि नहीं दिख रही। जिम्मेदार तो बेपरवाह हैं ही आम लोगों का भी कोई रुझान नहीं बढ़ रहा। हाल यह है कि ऑनलाइन दर्ज किए जा रहे सिटीजन फीडबैक में नगर काफी पीछे चल रहा है। कुल आबादी से पांच फीसदी लोगों का फीडबैक दर्ज किया जाना है। इसके सापेक्ष अब तक महज एक हजार लोगों ने ही अपनी प्रतिक्रिया दी है। उदासीनता का यही हाल रहा तो स्वच्छता सर्वे की रैंकिंग में नगर फिर से पीछे रह जाएगा।
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स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए कई मानक तय किए गए हैं। इसमें स्वच्छता सुविधाओं के भौतिक सत्यापन के बाद सिटीजन फीडबैक भी सबसे अहम है। स्वच्छता कार्यक्रमों में लोगों की सहभागिता जानने के लिए इन दिनों सिटीजन फीडबैक लिया जा रहा है। ऑनलाइन एप के माध्यम से लोगों को अपनी प्रतिक्रिया दर्ज करानी है। इसके तहत नगर की आबादी के न्यूनतम पांच फीसदी लोगों का फीडबैक लिया जाना है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार नगर की आबादी करीब 36 लाख है। इसकी पांच फीसदी आबादी यानी 1800 लोगों की प्रतिक्रिया दर्ज की जानी है। अंतिम तिथि में सिर्फ पांच दिन रह गए हैं लेकिन अब तक बमुश्किल एक हजार लोगों का ही फीडबैक प्राप्त हुआ है। हैरानी की बात है कि लोगों को इसके प्रति जागरूक करने और सहभागिता बढ़ाने का जिम्मा जिनके कंधे पर है वह भी उदासीन ही बने हुए हैं। जनसहभागिता सुनिश्चित करने के लिए कोई अतिरिक्त प्रयास भी नहीं हो रहा। न तो जागरुकता रैली निकाली गई है और न ही बैनर-पोस्टर व घर-घर संपर्क के तरीके अपनाए गए। नगर पालिका कार्यालय व एक-दो चौराहों पर इससे जुड़े होर्डिंग लगाकर इतिश्री कर ली गई है। इसी का नतीजा है कि नगर के ज्यादातर लोगों को यह भी नहीं पता कि स्वच्छता सर्वेक्षण चल रहा है और उन्हें अपना फीडबैक भी देना है। यही हाल रहा तो रैंकिंग में सुधार दूर की कौड़ी ही लग रही है।
बुजुर्गों की राय सबसे अहम
नगर पालिका के पास अब फीडबैक के लिए महज पांच दिन का समय शेष है। सर्वेक्षण में बदलाव के बाद इस बार सीनियर सिटीजन यानी बुजुर्गों की राय को विशेष महत्ता दी गई है। जिम्मेदार इसके लिए कोई ठोस प्रयास नहीं कर रहे। मोबाइल में एप डाउनलोड कराने और उसके माध्यम से प्रतिक्रिया दर्ज कराने में दिखाई जा रही सुस्ती रैंकिंग गिरा सकती है। हालांकि विभागीय अधिकारियों का दावा है कि फीडबैक के लिए कर्मियों को लगाया गया है जो सुबह से ही लोगों को जागरूक करने में जुट जाते हैं।
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हर तरफ कूड़े का अंबार बना चुनौती
जिले की एकलौती नगर पालिका में साफ-सफाई की हालत काफी खराब है। कई ऐसे इलाके हैं जहां नियमित सफाई नहीं होती है। नाली जाम पड़ी हुई है। नगर के रोडवेज से सटे दीपनगर, आर्यनगर, पूरब मोहाल सहित अन्य इलाकों में सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चौपट है। कई स्थानों पर सड़क पर कूड़ा बिखरा होता है। ऐसे में लोग सफाई व्यवस्था पर भी सवाल उठाते रहे हैं।
स्वच्छता सर्वेक्षण में फीडबैक की जानकारी अधिकांश लोगों को नहीं है। ऐसे में लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है। नगर की सफाई व्यवस्था काफी दयनीय है। अभी तक हमारे पास कोई भी फीडबैक के लिए नहीं आया है। - अशोक जैन, राबर्ट्सगंज।
नगर की सफाई-व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त है। कई इलाकों में सफाईकर्मी नियमित नहीं पहुंचते। ऐसे में शहर को अवार्ड कैसे मिल सकता है। काफी लोगों को सिटीजन फीडबैक की जानकारी भी नहीं है। साफ-सफाई बेहतर न होने से मच्छरों का प्रकोप भी काफी बढ़ रहा है। - रामविलास जैन, राबर्ट्सगंज।
स्वच्छता सर्वेक्षण के प्रति जागरूकता न होना विभाग की नाकामी है। योजनाबद्ध तरीके से लोगों की राय लेते हुए सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए। सिटीजन फीडबैक के बारे में अधिकांश लोगों को जानकारी ही नहीं है। - दिनेश जैन, राबर्ट्सगंज।
नगर में स्वच्छता सर्वेक्षण के प्रति लोगों को जागरूक किया जा रहा है। अब तक करीब एक हजार लोगों ने अपना फीडबैक दिया है। पूरी उम्मीद है कि निर्धारित समय सीमा तक कुल आबादी के पांच प्रतिशत से अधिक लोगों का फीडबैक का आंकड़ा पूरा कर लिया जाएगा। लोगों को कर्मचारियों की ओर से और पोस्टर के माध्यम से जागरूक किया जा रहा है। - नीरज कुुमार, स्वच्छ भारत मिशन, स्वच्छता (नगरीय)
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