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बाला सुंदरी मंदिर जहां भक्तों की होती है हर मुराद पूरी

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कैराना में 400 वर्ष प्राचीन मराठा कालीन सिद्धपीठ बाला सुन्दरी मन्दिर - फोटो : SHAMLI
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कैराना। कैराना में प्राचीन देवी मंदिर तालाब श्रृंखला में 400 वर्ष प्राचीन मराठा कालीन सिद्धपीठ बाला सुंदरी का मंदिर अपनी अद्भुत भवन निर्माण कला के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। मान्यता है कि मंदिर में सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद मां जगदंबे अवश्य पूरी करती है। नवरात्र के दिनों में मंदिर को दुल्हन की तरह सजाया जाता है। मंदिर के पुजारी पंडित अशोक कुमार शास्त्री ने बताया कि नवरात्र पर सुबह के समय आरती व पूजन तथा शाम को महाआरती के पश्चात प्रसाद वितरण किया जाता है। दुर्गा अष्टमी व नवमी पर मंदिर में विशाल भंडारा व मेले का आयोजन किया जाता है। यहां दूसरे प्रदेशों से भी श्रद्धालु मां के दर्शन करने आते हैं।
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मंदिर के गर्भ गृह में ऊपर एक छोटा रास्ता है। जहां पर सीढ़ियों से जाना पड़ता है। इसके बाद मंदिर के घुमाव के अनुसार पांच मंजिल सीढ़ियां हैं। श्रद्धालु सीढ़ियों से मंदिर की चोटी के अंदर सबसे ऊपर 5वीं मंजिल पर बने फर्श पर बैठकर कुछ देर के लिए थकान मिटाते है। यहां बनी खिड़कियों से 6 किलोमीटर दूर बह रही यमुना के दर्शन करते हैं। 400 साल पहले मंदिर की दीवारों पर करोड़ों सीपियों को पीस उसके पाउडर से प्लास्टर किया गया था। 400 साल में मंदिर ने तूफान, बारिश व भूकंप तक झेले लेकिन मंदिर की दीवारें आज भी चमचमाती है।
बाला सुंदरी मंदिर की इतिहास
श्रीदेवी मंदिर तालाब सेवा समिति के सचिव सुभाष सिंघल ने बताया कि करीब 400 साल पहले मराठा काल में कैराना निवासी लाला रंगी लाल राजस्थान की एक रियासत में राजा के दरबार में मुनीम थे। लाला रंगी लाल के कोई संतान नहीं थी। लाला रंगी लाल बहुत ही धार्मिक प्रवृत्ति के थे। लाला रंगी लाल ने प्राचीन देवी मंदिर तालाब की 164 बीघा जमीन देवी मंदिर तालाब के नाम से दान दे दी थी। जिस पर मां बाला सुंदरी का भव्य मंदिर बनाया गया था। 164 बीघा जमीन के चारों और रास्ता बना है। मध्य में प्राचीन तालाब और एक और बाला सुंदरी मंदिर जिसके परिसर में भगवान शिव, राधा कृष्ण, राम दरबार, श्रीगणेश, प्राचीन हनुमान के मंदिर बने है। बराबर में ही बालाजी धाम तथा इससे साथ माता काली व विश्वकर्मा जी का मंदिर है। दूसरी ओर, सिद्धपीठ बनखंडी महादेव मंदिर है। इस 164 बीघा जमीन में से 35 बीघा जमीन सरकारी अस्पताल को दान दे दी गई थी। जिस पर अस्पताल बना है। गोशाला भवन से मंदिर जाने वाले रास्ते पर जैसे ही कदम पड़ते है तो मन में विशेष आनंद की अनुभूति होती है।
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