शाहजहांपुर। दिवाली के दौरान हुई आतिशबाजी के बाद से वातावरण खासा प्रदूषित हुआ है, खासकर वायु प्रदूषण बढ़ गया है। दो सप्ताह पहले हुई भारी वर्षा के बाद से हवा में घुली आर्द्रता के कारण आसमान में ऊंचाई पर बादलों की धुंध पहले से छाई हुई है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार हवा में उड़ रहे सूक्ष्म धूल कणों के भार से धुंध नीचे आ रही है। डॉक्टर भी मानते हैं कि स्वास्थ्य की दृष्टि से मौसम की यह स्थिति अस्थमा, एलर्जी और फेफड़े के रोगियों के लिए नुकसानदेह है और इससे बचने के लिए उन्हें ऐहतियाती उपाय करने होंगे।
गत तीन दिन से वायुदाब में उतार-चढ़ाव भी मौसम को जनजीवन के स्वास्थ्य की दृष्टि से प्रतिकूल बना रहा है। बृहस्पतिवार को सुबह बैैैरोमीटर सूचकांक सामान्य से करीब आठ मिलीबार कम रहा। इस वजह से सूर्योदय से पहले हवा की गति बिल्कुल थम गई। नतीजा यह हुआ कि धूप निकलने पर हवा में तैरते पीएम-10 पार्टिकल्स (सूक्ष्म धूल कण) ने धुंध पर दबाव बनाया और इस कारण भोर होने से पहले से लेकर सात बजे के बाद तक वातावरण पर कुहासा छाया रहा।
इससे उन लोगों को घुटन के साथ सांस लेने में दिक्कत होने लगी जो श्वसन तंत्र की समस्याओं से पहले से जूझ रहे हैं।
गन्ना शोध परिषद के मौसम विश्लेषक सुरेंद्र सिंह के अनुसार आधी रात के बाद से सुबह देर तक धुंध बनी रहने से बीते 24 घंटे की तुलना में न्यूनतम तापमान 0.4 डिग्री घटकर 14 डिग्री सेल्सियस हो गया। उनका कहना है कि दिन में धूप निकलने से अधिकतम तापमान 0.2 डिग्री बढ़कर 30.4 डिग्री सेल्सियस हुआ, लेकिन दोपहर तक धुंध का असर बना रहने से धूप में गरमी कम रही और मौसम के यह हालात अगले दो दिन तक बने रहने के आसार हैं।
श्वांस के रोगी बरतें यह सावधानी
- सुबह एक गिलास गुनगुने पानी के सेवन से दिनचर्या शुरू करें।
- धुंध और कोहरा छाए होने के दौरान कमरों के अंदर बने रहें।
- सुबह सोकर उठने के तुरंत बाद बिस्तर छोड़ने से बचें।
- कुछ देर कमरे में रहकर शरीर को बाहरी तापक्रम के अनुसार ढालें।
- बिस्तर छोड़ने पर नंगे पांव उतरने के बजाय पैरों में स्लीपर जरूर पहनें।
- घर से बाहर निकलने पर धूल-धुंध से बचाव को मास्क जरूर लगाएं।
- सांस लेने में परेशानी महसूस होने पर तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें।
(जैसा कि चेस्ट फिजीशियन डॉ. राजीव सिंह ने बताया)