शाहजहांपुर। नदियां सिमटने के साथ बाढ़ का प्रकोप कम हो गया, लेकिन संक्रामक बीमारियां अपने पैर पसारने लगी हैं। जलभराव की वजह से लोग उल्टी, दस्त, वायरल फीवर, त्वचा रोग के शिकार हो रहे हैं। बाढ़ के दौरान सुरक्षित स्थान पर गए बाढ़ पीड़ित अपने घरों को लौटने लगे हैं। घर पहुंचने पर उन्होंने साफ सफाई करने के साथ घरों को संवारना शुरू कर दिया है।
पिदले 24 घंटे के दौरान कलान के भैंसार बांध पर गंगा का जलस्तर लगातार चौथे दिन 25 सेमी, बरेली के चौबारी घाट से लेकर जनपद में रामगंगा 29 सेमी, शहर के समीप गर्रा 60 सेमी और खन्नौत का जलस्तर 70 सेमी कम हुआ है। सिंचाई विभाग के बाढ़ नियंत्रण कक्ष को मिली सूचनाओं के अनुसार नरौरा से गंगा में, ड्यूनी डाम से गर्रा में और अन्य बैराजों से रामगंगा में अतिरिक्त पानी की निकासी भी बहुत कम हो गई, लेकिन अब बाढ़ से निचले स्थानों पर हुआ जलभराव जन सामान्य को दिक्कत दे रहा है। शहर में गर्रा-खन्नौत नदियां अपने पेटे में जा रही हैं, लेकिन उनमें आई बाढ़ से जलमग्न हुए लोधीपुर, सुभाषनगर, ककरा कलां, बिसरात, हनुमत धाम, दलेलगंज के आबादी क्षेत्रों के आसपास अभी तक पानी भरा है और वहां उठ रही सड़ांध से लोग बीमार होने लगे हैं।
मिर्जापुर क्षेत्र में बाढ़ के बाद फसलों के सड़ने से फैली दुर्गंध से लोगों का खेतों से निकलना मुश्किल है। गंदगी और सड़ांध से बुखार व त्वचा रोगियों में वृद्धि हो गई है। लगभग एक पखवाड़े से डूबी फसलों से बाढ़ का पानी कम हो रहा है। जिन खेतों से बाढ़ का पानी निकल गया है, उनमें डूबी फसलें सड़ रहीं है। खेतों में फैली सड़ांध से लोग मुंह मे कपड़ा बांध कर निकल रहे हैं। अब संक्रामक रोगों ने भी दस्तक दे दी है। क्षेत्र में शायद ही कोई ऐसा घर हो, जिसमें एक-दो रोगी न हों। सीएचसी में भी बुखार के रोगियों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। सीएचसी प्रभारी डॉ. आदेश रस्तोगी का कहना है कि बाढ़ के बाद बुखार और त्वचा के रोगी बढ़ गए हैं। उन्होंने बताया कि अस्पताल में सभी रोगों की पर्याप्त दवाएं हैं।
उधर, जलालाबाद क्षेत्र में बाढ़ का पानी लगातार कम होने के बाद भी अभी गांवों के हालात सही होने में समय लगेगा। दिवाली नजदीक होने के कारण घर की साफ सफाई और अन्य घरेलू व्यवस्थाएं दुरुस्त करने की चिंता में अस्थाई आवास में रह रहे तमाम पीड़ित घरों को लौटने लगे हैं। अपने पीछे बर्बादी के निशान छोड़ता हुआ बाढ़ का पानी लगातार सिमट रहा है। पिछले छह दिनों से जहां पानी भरा रहा, वहां खेत खलिहान से लेकर गांव की गलियों तक कीचड़ के सिवाय कुछ नजर नहीं आ रहा। एसडीएम बरखा सिंह ने कोला रोड पर रह रहे बाढ़ पीड़ितों से भेंट कर उनकी समस्याएं सुनीं और विस्थापित परिवारों को भोजन के पैकेट व पन्नियां आदि वितरित कराईं।
अल्हागंज। बाढ़ पीड़ि ग्रामीण अभी सड़क के किनारे बने अस्थाई आशियानों में रह रहे थे, जो अपने घर को लौटने लगे हैं। उन्हें चिंता है कि दिवाली कैसे मनेगी क्योंकि बाढ़ ने उनका दिवाला निकाल दिया है। उन्हें फिक्र है कि नष्ट हो चुके आलू का बीज कहां से आएगा क्योंकि बोया गया आलू बीज अब सड़ चुका है। धान और तिल की की फसल भी अब नष्ट हो चुकी है। त्योहार पर बच्चों की मिठाई की फरमाइश पूरी करना भी कठिन होगा क्योंकि उनके आगे पेट भरने की समस्या है। सरकार की तरफ से उन्हें अभी कोई आर्थिक मदद नहीं मिल पा रही है। तमाम परिवारों के पास बीमारों के इलाज और जानवरों के लिए चारा खरीदने को भी पैसे नहीं हैं। गांव मऊ शाहजहांपुर निवासी सीताराम के अनुसार पिछले तीन दिन से वह रामगंगा नदी के पास हाईवे किनारे अस्थाई निवास बनाकर रह रहे थे, लेकिन अब अपने उजड़े घर को संवारने जा रहे हैं।
सीएमओ डॉ. एसपी गौतम ने बताया कि बीमारियों के मद्देनजर स्वास्थ्य केंद्रों को सतर्क किया गया है। टीमें भेजकर भी लोगों का इलाज किया जाएगा।