24 हजार बच्चों पर मात्र एक चिकित्सक
डब्ल्यूएचओ के अनुसार एक हजार की आबादी पर एक डॉक्टर जरूरी
जिले में शून्य से लेकर पांच वर्ष तक के दो लाख 96 हजार बच्चे हैं चिह्नित
12 बाल रोग विशेेषज्ञों की है तैनाती
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर से बच्चों के सबसे ज्यादा प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। इसके लिए चार सीएचसी पर मॉक ड्रिल भी हुई थी। जिले में 12 बाल रोग विशेेषज्ञ हैं। शून्य से लेकर पांच वर्ष तक के दो लाख 96 हजार बच्चे चिह्नित है। इसके अनुसार 24 हजार बच्चों पर एक बाल रोग विशेषज्ञ तैनात हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक के अनुसार एक हजार बच्चों पर एक चिकित्सक होना चाहिए। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में शून्य से लेकर पांच वर्ष तक के बच्चों के साथ पांच वर्ष से ऊपर और 12 वर्ष तक के बच्चों को जोड़ दिया जाए तो यह संख्या दोगुनी हो जाएगी। इस तरह शून्य से पांच वर्ष के 24 हजार बच्चों पर एक बाल रोग विशेषज्ञ की उपलब्धता है। हालांकि, स्वास्थ्य महकमा के अधिकारी कहते हैं कि इस हालात से निपटने के लिए पुख्ता इंतजाम हैं। जिला अस्पताल में पांच बाल रोग विशेषज्ञ और सातों सीएचसी पर एक-एक बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती है। इस संबंध में सीएमएस डॉ. ओपी चतुर्वेदी ने बताया कि जिला अस्पताल में पांच बाल रोग विशेषज्ञ हैं। इसके साथ ही पीकू वार्ड, आईसीयू की व्यवस्था है। यही नहीं जिला अस्पताल के एमसीएच विंग के कोविड अस्पताल में 20 बेड का ऑक्सीजनयुक्त पीकू वार्ड तैयार किया गया है। तीसरी लहर से निपटने की पूरी तैयारी है।
उधर, सीएमओ डॉ. इंद्रविजय विश्वकर्मा ने बताया कि जिले में सात सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। हर केंद्र पर एक बाल रोग विशेषज्ञ है। जिला अस्पताल में पूरी व्यवस्था है। दो सीएचसी पर मिनी पीकू भी है। तीसरी लहर से पूरी तरह से निपटने की तैयारी है। जो सुविधा है, उसी के अनुरूप इलाज किया जाएगा।
जिले में स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था
जिला अस्पताल में 20 बेड का पीकू वार्ड, कोविड अस्पताल में 20 बेड का पीकू अस्पताल
पीकू (पीडियाट्रिक इंसेटिव केयर यूनिट) अस्पताल में तीमारदारों के रहने की अलग से है व्यवस्था
अस्थायी किचन भी बनाया गया है, स्वयंसेवी संस्था भोजन भी देती है
सीएचसी हैंसर और मेंहदावल में तीन-तीन बेड का मिनी पीकू वार्ड
सात सीएचसी पर भी एक-एक बाल रोग विशेषज्ञ