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संभल की इस बेटी ने भूखे रहकर किया खेल के लिए अभ्यास, अब बनाया रिकॉर्ड

Fri, 09 Mar 2018 01:33 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, संभल।
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सरिता सिंह - फोटो : file
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लगन और मेहनत के साथ लंबे संघर्ष ने सरिता सिंह को कामयाबी के उस मुकाम पर लाकर खड़ा कर दिया है कि देश ही नहीं बल्कि विदेश में भी उनकी खेल प्रतिभा का डंका बजने लगा है। एक महीने के भीतर दूसरी बड़ी कामयाबी उनके खाते में जुड़ गई है। उन्होंने 11-14 फरवरी तक जकार्ता इंडोनेशिया में आयोजित एशियन टूर्नामेंट में हैमर थ्रो में रजत पदक जीता। इसके बाद 5 मार्च से पटियाला में आयोजित 22 वीं फेडरेशन कप सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में सरिता सिंह ने स्वर्ण पदक जीत कर संभल जिले का नाम खेल की दुनिया में रोशन कर दिया। उनकी कामयाबी से संभल जिले के खेल प्रेमियों और उनके परिजनों में खुशी का माहौल है।

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संभल जिले की परियावली और सैदपुर जसकोली में उनकी जीत से लोग बहुत खुश हैं। मूल रूप से सैदपुर जसकोली की निवासी सरिता सिंह का विवाह परियावली निवासी खिलाड़ी रोमित सिंह के संग हुआ है। इसलिए ससुराल और मायके में खुशी का माहौल है। पटियाला में 5 मार्च को आयोजित चैंपियनशिप में सरिता सिंह ने 63.80 मीटर थ्रो करके स्वर्ण पदक हासिल किया। सरिता सिंह हैमर थ्रो में एक बार फिर राष्ट्रीय चैंपियन बन गईं हैं। कई राष्ट्रीय रिकार्ड भी उनके नाम हैं। अब उनका ध्यान अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं की ओर है। इससे पहले उन्होंने 21 वीं फेडरेशन कप सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने रिकार्ड बनाया था।


सरिता सिंह ने बताया कि कभी कभी ऐसा होता था कि एक वक्त भोजन नहीं मिलता था। अहम बात यह है कि उन्होंने कभी खेल का अभ्यास नहीं छोड़ा। भूखे पेट रह कर भी मेहनत की और उसी मेहनत की बदौलत ऐसा मुकाम मिला कि आज प्रत्येक सुविधा सामने है। वेस्टर्न रेलवे में कार्यालय अधीक्षक के पद पर नौकरी मिल गई। उनके पति भी खिलाड़ी हैं और रेलवे में वरिष्ठ लिपिक के पद पर सेवारत हैं। दोनों की तैनाती दाहोद में हैं। सरिता ने बताया कि कामन वेल्थ गेम के लिए उनका चयन हो सकता है। इसके बारे में उन्हें शुक्रवार को जानकारी मिलेगी क्योंकि जकार्ता और पटियाला में मिली जीत ने उनके लिए कामनवेल्थ में जाने की संभावना बढ़ा दी है।

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शादी के बाद भी खेलना बंद नहीं कियासंभल। सैदपुर जसकोली निवासी प्रकाश सिंह की बेटी सरिता सिंह को शुरू से ही खेल में रुचि थी। उसकी रूचि को देखते हुए पिता ने सरिता का दाखिला नारंगपुर इंटर कालेज में करा दिया था। नारंगपुर में सरिता सिंह ने पढ़ाई के साथ-साथ खेल पर पूरा ध्यान दिया। कालेज के कोच की देखरेख में सरिता सिंह ने हैमर-थ्रो खेलना शुरू किया। उन्होंने कई राष्ट्रीय स्पर्धाओं में पदक जीते। खेल प्रतिभा की बदौलत वर्ष 2011 में उन्हें रेलवे नौकरी मिली। रेलवे ने उनकी खेल प्रतिभा को निखारा। सरिता ने बताया कि पहले पिता ने और फिर पति ने प्रोत्साहन दिया। सरिता का कहना है कि मां शकुंतला देवी, सास वीरवती देवी, ससुर धर्मपाल सिंह ने भी उनकी खेल प्रतिभा को निखारने में भरपूर सहयोग दिया है। यदि परिवार का प्रोत्साहन न होता तो इस मुकाम को हासिल करना मुश्किल होता।


मेरे पापा चाहते थे कि मेरी बेटी खेल के जरिए पूरे देश में नाम रोशन करे पर पापा की इच्छा को ध्यान में रखकर मैंने पढ़ाई के साथ खेल पर भी ध्यान दिया। महिला दिवस पर मैं अपने लड़कियों से यही कहना चाहती हूं कि वे अपने हौसले को दबाएं नहीं बल्कि उभारें और जो करना चाहती हैं उस पर बेखौफ होकर आगे बढ़ें। अगर हिम्मत दिखाएंगी तो कामयाबी मिलेगी। मेरा कहना है कि कामयाबी मिलने में वक्त तो लगता है पर धैर्य के साथ प्रयत्न को जारी रखें।

सरिता सिंह, हैमर थ्रो की राष्ट्रीय चैंपियन।

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