रामपुर। भूगर्भ जलस्तर सुधारने और नहरों के जरिये किसानों की फसलों की सिंचाई के लिए समाजवादी पार्टी की सरकार में मंजूर हुआ कोसी नदी बैराज का निर्माण अब तक नहीं हो सका है। हालांकि, अब सिंचाई विभाग ने रिवाइज एस्टीमेट तैयार कर शासन को भेजा है। इसके तहत बैराज के निर्माण में 595 करोड़ रुपये खर्च होंगे, जबकि पहले यह प्रोजेक्ट 216.35 करोड़ रुपये की लागत का था। इस तरह छह साल में बैराज की लागत में 379 करोड़ रुपये का इजाफा हो गया। अफसरों की माने तो शासन से धन जारी होते ही प्रोजेक्ट का काम शुरू करा दिया जाएगा।
समाजवादी पार्टी की सरकार के दौर में रामपुर में कोसी नदी पर बैराज के निर्माण की घोषणा की गई थी। यह एलान खुद तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अक्तूबर 2013 को रामपुर आकर किया था। इसके बाद अफसरों ने प्रस्ताव तैयार किया, जिसे अफसरों ने तुरंत मंजूरी दे दी थी। उस समय यह प्रोजेक्ट 216.35 करोड़ रुपये का मंजूर हुआ था, जिसे मार्च 2018 तक पूरा किया जाना था। इसके लिए सपा सरकार ने 2014 में 14 करोड़ और 2015 में 30 करोड़ रुपये जारी कर दिए थे, जिसके बाद तेजी से काम शुरू हुआ था। कार्यदायी संस्था ने आवश्यक निर्माण सामग्री जुटाने के साथ ही मशीनरी एवं टूल्स आदि जुटा लिए, इसके बाद बैचिंग प्लांट स्थापित कर दिया गया था। कार्य स्थल पर बैराज निर्माण के लिए फाउंडेशन की खोदाई, डायवर्जन बांध का निर्माण तथा डिवाटरिंग आदि कार्य ही हो सका था।
2017 में सूबे में सत्ता परिवर्तन हो गया और भाजपा की सरकार बन गई। इसके साथ सपा सरकार के तमाम प्रोजेक्ट अधर में लटक गए। इसमें कोसी नदी पर बन रहा बैराज भी शामिल था। तब से ही यह काम बंद है और बैराज अधर में लटका हुआ है। हालांकि, सिंचाई विभाग की ओर से इस बाबत नए सिरे से एस्टीमेट बनाकर शासन को भेजा गया है, जो 595 करोड़ का है। ऐसे में छह साल में ही प्रोजेक्ट की लागत 379 करोड़ रुपये बढ़ गई। सिंचाई विभाग के अधिकारियों की मानें तो जैसे ही शासन ने एस्टीमेट को मंजूरी मिल जाएगी, प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर दिया जाएगा।
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मिट्टी की जांच को लेकर फंस गया था प्रोजेक्ट
रामपुर। भाजपा सरकार बनने के बाद सिंचाई विभाग की ओर से बनाए जा रहे कोसी बैराज के निर्माण स्थल की मिट्टी की जांच को लेकर शासन से आदेश जारी किए गए थे। ताकि, कहीं ऐसा न हो कि जहां बैराज बन रहा है उसका फाउंडेशन ही गलत बन जाए और उसका फायदा होने के बजाय नुकसान हो जाए। विभाग की ओर से मिट्टी की जांच की गई। विभागीय अफसरों के मुताबिक जांच में पता लगा कि पहले जिस फाउंडेशन के आधार पर प्रोजेक्ट तैयार किया गया था, वह मिट्टी ही काफी कमजोर है। ऐसे में खुदाई अधिक होगी। लिहाजा, फाउंडेशन तैयार करने में लागत भी बढ़ती तो विभाग की ओर से नए सिरे से एस्टीमेट तैयार किया गया था, जिस वजह से लागत में इजाफा हो गया। इसके अलावा निर्माण सामग्री के तब और अब के रेटों में काफी फर्क आ गया है, जिस वजह से लागत में इजाफा हो गया।
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25000 हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई में होता मददगार
रामपुर। कोसी नदी का बैराज यदि पूरा हो जाता, तो आज जिले की करीब 25 हजार हेक्टेयर जमीन की सिंचाई हो रही होती। किसानों के खेतों तक पानी पहुंचता। इसके अलावा बैराज का निर्माण होने से टांडा, सैदनगर और चमरौआ के भूगर्भ जलस्तर में भी सुधार होता।
कोट
कोसी नदी के बैराज का नया एस्टीमेट शासन को भेजा जा चुका है, जो करीब 595 करोड़ रुपये का है। शासन से धन जारी होते ही प्रोजेक्ट पर फिर से काम शुरू कर दिया जाएगा। प्रयास किया जा रहा है कि जल्द ही धन जारी हो जाए। - सियाराम, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग, रामपुर