पीलीभीत। लंबे समय से पदक के लिए हॉकी खिलाड़ी और सिमरनजीत के प्रशंसक दुआएं कर रहे थे। आखिरकार थर्ड प्लेस में टीम इंडिया ने कांस्य पदक पर कब्जा कर लिया। इंडिया की जीत के बाद खिलाड़ियों में उत्साह दिखाई दिया। उन्होंने स्टेडियम में तिरंगा लहराते हुए जश्न मनाया। उनका कहना था कि उन्हें पूरी उम्मीद थी कि टीम इंडिया पदक जरूर जीतेगी।
इंडिया और जर्मनी के बीच खेल गए थर्ड प्लेस मैच में इंडिया जीत हासिल करते हुए कांस्य पदक जीत लिया। इंडिया की जीत के बाद हॉकी प्रेमियों में खुशी का ठिकाना नहीं रहा और गांधी स्टेडियम पहुंचकर अपने साथियों के साथ जीत का जश्न मनाते हुए तिरंगा लहराया। गांधी स्टेडियम के जिला क्रीड़ा अधिकारी राजकुमार और हॉकी कोच आबिद अली ने खिलाड़ियों में उत्साह भरते हुए बेहतर प्रदर्शन करने को कहा। जिला क्रीड़ा अधिकारी राजकुमार ने कहा कि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती है। इसलिए टीम इंडिया ने ओलंपिक में कांस्य पदक जीता है। यह देश के लिए गर्व की बात है। इसके बाद सभी हॉकी खिलाड़ियों ने एक दूसरे को मिठाइयां खिलाकर जीत का जश्न मनाया।
टीम इंडिया ने कांस्य पदक जीता है।। यह गर्व की बात है। 41 साल के बाद इंडिया को यह पदक मिला है। दिल से खुशी है। इंडिया की टीम और आगे जाए। - आदित्य कुमार, राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी
सेमीफाइनल में हराने के बाद भी इंडिया ने हार नहीं मानी। क्योंकि गेम्स में हार और जीत दोनों ही होती है। खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन के चलते पदक जीता है। - सौरभ सक्सेना, सीनियर वाइस प्रेसिडेंट कोहिनूर क्लब हॉकी
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ओलंपिक में टीम इंडिया ने बेहतर मैच खेला। सिमरनजीत जिस मैच में खेले वह मैच इंडिया जीती। इससे लक कहें या फिर बेहतर खिलाड़ी। फिलहाल सभी ने अच्छा प्रदर्शन किया था। - खालिद मियां, सीनियर हॉकी खिलाड़ी
ओलंपिक में विश्व भर के खिलाड़ी अपना प्रदर्शन दिखाते हैं। वहां पदक जीतना बड़ी कामयाबी होती है। इंडिया ने भारत का नाम रोशन किया है। उन्हें उम्मीद है आने वाले दिनों में भी इससे बेहतर प्रदर्शन कर अन्य पदकों पर कब्जा करेगी। - डॉ. राकेश गुप्ता, संरक्षक कोहिनूर हॉकी क्लब
टीम इंडिया ने ओलंपिक में शुरुआत से अच्छा प्रदर्शन किया था। लगातार मैच में बढ़त हो रही थी, मगर कोशिश से इंडिया ने कांस्य पदक जीता है। सिमरनजीत ने पंजाब में हॉकी की शिक्षा ग्रहण की थी। एक बार पीलीभीत के स्टेडियम में सिमरनजीत आए थे। जहां खिलाड़ियों को उन्होंने टिप्स भी दिए थे। - राजकुमार, जिला क्रीड़ा अधिकारी