पीलीभीत। टोक्यो ओलंपिक में भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने इतिहास रच दिया है। चार दशक के बाद टीम इंडिया को ओलंपिक का पदक मिला है। बृहस्पतिवार को टोक्यो ओलंपिक के प्ले ऑफ मुकाबले में टीम इंडिया ने जर्मनी को 5-4 से हराकर कांस्य पदक अपने नाम कर लिया। भारतीय पुरुष टीम की कड़ी मेहनत इस ऐतिहासिक जीत में सफलता का राज बनी। जिसमें पीलीभीत के लाल (खिलाड़ी) सिमरनजीत सिंह का महत्वपूर्ण योगदान रहा। उनके द्वारा किए गए दो गोल और पेनल्टी कॉर्नर दिलाया है। खास बात यह है कि ओलंपिक में जब-जब सिमरनजीत मैदान में उतरा तो इंडिया को जीत दिलाई है। हालांकि कुछ मैच में सिमरन के न खेलने के कारण इंडिया को हार का सामना करना पड़ा। सिमरनजीत के इस प्रदर्शन के चलते उनके परिवार वालों का ही नहीं बल्कि जिले के लोगों गर्व महसूस कर रहे हैं।
मझोला कस्बे से आठ किलोमीटर दूर मझारा फार्म के रहने वाले इकबाल सिंह के बेटे सिमरनजीत सिंह ने पंजाब में अपने ताऊ रक्षपाल सिंह के घर रहकर हॉकी की पूरी शिक्षा और दीक्षा ग्रहण की। उनके ताऊ एक हॉकी खिलाड़ी थे। सिमरनजीत के पिता इकबाल ने बताया कि पांच साल की उम्र में सिमरन में हॉकी के प्रति रुझान देखकर वह उसे अपने साथ ले गए थे। जहां उन्होंने पंजाब के गुरुदासपुर बंडाला में चीमा एकडेमी में उसका एडमिशन कर दिया। जहां कोच रंजीत सिंह के नेतृत्व में प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस दौरान सबसे पहले वह 2015 में हीरो हॉकी इंडिया लीग की तरफ से खेल थे। जिसमें वह रनरअप रहे थे। 2016 में आयोजित जूनियर वर्ल्ड कप में सिमरन के गोल से इंडिया ने वर्ल्ड कप पर कब्जा किया था। बेहतर प्रदर्शन देखकर सिमरन को सीनियर टीम में शामिल कर लिया था। बंगलूरू में प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद वह ओलंपिक के लिए चुना गया था।
कुछ इस तरह रहा था टोक्यो का ओलंपिक हॉकी
टोक्यो ओलंपिक में जाने के बाद वहां कुल छह मैच हुए थे। इसमें पहला मैच इंडिया और न्यूजीलैंड जिसमें सिमरन को अपनी प्रतिभाग दिखाने का मौका नहीं मिला। हालांकि इसमें इंडिया को जीत हासिल हुई थी। दूसरा मैच इंडिया और आस्ट्रेलिया के बीच खेल गया था। जिसमें 7-1 से हार गई थी। इसमें सिमरन नहीं खेल थे। तीसरी मैच इंडिया और स्पेन के बीच खेल गया। इसमें सिमरनजीत ने खेलते हुए 14वें मिनट में पहला गोल दागा था और एक पेनल्टी कॉर्नर बना था। इसमें इंडिया को जीत मिली थी। चौथा मैच अर्जेंटीना से हुआ था। इसमें मैच खेले थे। इसमें भी इंडिया मैच जीती थी। पांचवां मैच इंडिया और जापान के बीच खेल गया। इसमें सिमरन खेल थे और क्वार्टर फाइनल में टीम को पहुंचाया था। छठा मैच सेमीफाइनल बेल्जियम के साथ खेला गया। जिसमें सिमरन को नहीं खिलाया गया था। इसमें टीम को हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद थर्ड प्लेस का मैच इंडिया और जर्मनी के बीच खेल गया। इसमें जर्मनी ने दो गोल इंडिया पर दागते हुए दबाव बना लिया था। इसके बाद सिमरन जीत ने वापसी करते हुए दो गोल और एक पेनल्टी कॉर्नर बना था।