दो सालों से सीबीएसई द्वारा आयोजित होने वाली क्लस्टर प्रतियोगिताएं भी आयोजित नहीं हो सकी हैं। ऐसे में छात्र-छात्राओं को खेल प्रतियोगिताएं भी नहीं मिल सकी हैं। वार्षिक कैलेंडर में स्कूलों ने अपने स्तर से छोटी बड़ी प्रतियोगिताओं को शेड्यूल किया है।
घर पर नहीं मिला स्कूल जैसा माहौल
काफी समय से घर रहने के कारण बच्चों ने शारीरिक गतिविधियां नहीं की हैं, जैसा माहौल उन्हें स्कूल में मिल पाता है वह घर पर नहीं मिल सका। इसको देखते हुए हमने वार्षिक कैलेंडर में विशेष पीरियड रखे हैं। जिसमें बच्चों के शारीरिक विकास पर ध्यान दिया जा सके। इसके लिए बच्चों को स्कूल में खेलों से भी जोड़ा जा रहा है। - एनपी सिंह, प्रधानाचार्य, गुरु तेग बहादुर पब्लिक स्कूल, वेस्ट एंड रोड
आलसी हो गए हैं बच्चे
महावीर एकेडमी की प्रधानाचार्य मृदुला गर्ग ने कहा ऑफलाइन कक्षाओं में काफी समय बाद लौटे बच्चे आलसी हो गए हैं। काफी समय तक घर में रहने के कारण यह दुष्प्रभाव दिखे हैं। बच्चों के लिए किताबी ज्ञान के साथ शारीरिक गतिविधियां बेहद जरूरी हैं। इस साल क्लस्टर नहीं हो सके हैं, ऐसे में बच्चों के शारीरिक विकास की ओर ध्यान देने के लिए स्कूलों को अपने स्तर से ही छोटी बड़ी प्रतियोगिताएं करानी चाहिए। - मृदुला गर्ग, प्रधानाचार्य, महावीर एकेडमी