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शारदा और घाघरा नदियां क्षेत्र में मचा रहीं तबाही

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धौरहरा। तहसील क्षेत्र में शारदा और घाघरा नदियों की तबाही रुकने का नाम नहीं ले रही है। रोज सैकड़ों बीघा फसल लगी भूमि को निगलकर नदी किसानों को भूमिहीन बना रही है।
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एक सप्ताह से लगातार घाघरा नदी ने ब्लॉक रमियाबेहड़ की ग्राम पंचायत रामनगर बगहा के गोडियन पुरवा में तबाही मचाते हुए तीन घरों सहित एक धार्मिक स्थल को निगल लिया है, जबकि कई घर कटान की जद में हैं। रमियाबेहड़ के ही मोटेबाबा, बाछेपारा, बिंजहा, ईसानगर के लौकाही मल्लापुर, पोखरा में घाघरा नदी फसल लगी जमीनों को निगल रही है।
वहीं कटान के मामले में शारदा नदी भी पीछे नहीं है। रैनी में 50 मीटर बांध को काटकर नदी ईसानगर के मिश्रगांव, जमदरी, खनवापुर और खड़वा में कटान कर रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन द्वारा कट रही जमीनों को बचाने के लिए कोई उपाय नहीं किया जा रहा है। उधर, जेई बाढ़ खंड भगवानदीन ने बताया कि गोडियन पुरवा में कटान रोकने के लिए बोरियों में मिट्टी व पिलर में रोड़ा भरकर डाला जा रहा है। कटान रोकने की हरसंभव कोशिश की जा रही है।
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फिर बढ़ा शारदा का जलस्तर, 52 सेंटीमीटर ऊपर पहुंची
पलियाकलां। दो दिनों से नरम पड़े शारदा नदी के तेवर बुधवार को फिर बढ़ गए और नदी खतरे के निशान से 52 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गई है।
बनबसा बैराज से रिलीज किए करीब एक लाख क्यूसेक पानी के कारण नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बुधवार की शाम से ही नदी का जलस्तर बढ़ने लगा और बृहस्पतिवार को दोपहर चार बजे तक नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 52 सेंटीमीटर ऊपर 154.620 सेंटीमीटर पर बह रहा था। जल आयोग के मुताबिक नदी सुबह की तुलना में अब कम होने लगी है और धीरे-धीरे जलस्तर में गिरावट आ रही है। हालांकि नदी का बढ़ता-घटता जलस्तर ग्रामीणों की धड़कनें बढ़ा रहा है। खेतिहर इलाके में नदी कटान भी कर रही है। बोझवा ठोकर नंबर जीरो व एक के पास नदी तेजी से कटान कर रही है। इमलिया फार्म जाने वाले रास्ते पर अभी भी जलभराव है। इससे ग्रामीणों का आवागमन पूरी तरह से बंद है। संवाद
बाढ़ से कई रास्तों पर बह रहा पानी
बिजुआ। शारदा नदी में आई बाढ़ से कई रास्तों पर कई-कई फुट तक पानी बह रहा है। इसस सिर्फ पैदल चलने वाले लोग ही निकल पा रहे हैं।
ब्लॉक बिजुआ की ग्राम पंचायत जंगल नंबर सात में इमलिया फार्म के पास रोड पर पानी चल रहा है, जिससे छंगाटांडा, इमलिया फार्म, फत्तेटांडा, नया देशराज टांडा, राऊ टांडा, ढकिया कुंअर पुर, बझेड़ा आदि गांवों के लोगों को आवागमन में भारी परेशानी हो रही है। अगर इन गांवों के लोगों को तहसील में काम के लिए पलिया जाना है तो लगभग बीस किलोमीटर की दूरी ज्यादा तय करके भीरा होकर जाना पड़ता है। संवाद
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