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कोविड से जंग जीतने के लिए चाक चौबंद हुईं स्वास्थ्य सेवाएं

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जिला अस्पताल में संचालित ऑक्सीजन प्लांट।
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दूसरी लहर में मरीजों को ऑक्सीजन एवं बेड तक के पड़ गए थे लाले
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दस ऑक्सीजन प्लांट सहित करीब 700 ऑक्सीजन युक्त तैयार हैं बेड
लखीमपुर खीरी। कोरोना की पहली और दूसरी लहर ने जहां जिले की चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी थी, वहीं अब दोनों लहर गुजर जाने के बाद कोविड से निपटने की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं लगभग दुरुस्त हो चुकी हैं।
जिले में कोरोना ने मार्च 2020 में दस्तक दी। पहली लहर में करीब तीन माह का लॉकडाउन होने से इसका प्रकोप जिले में कम ही देखने को मिला, लेकिन दूसरी लहर में कोरोना ने जमकर तबाही मचाई। कोरोना की मार से बेहाल मरीजों को ऑक्सीजन सिलिंडर से लेकर भर्ती करने के लिए बेड मुहैया कराने में स्वास्थ्य विभाग का पसीना छूट गया। एक- एक सिलिंडर के लोग परेशान हो उठे। स्थिति इतनी विकराल हो गई हो कि लोग आपदा में अवसर तलाश कर इनकी कालाबाजारी तक करने लगे। फिलहाल, दूसरी लहर की सुनामी को देखकर स्वास्थ्य विभाग ने संभावित तीसरी लहर को लेकर तैयारियां शुरू कर दीं, जिसके बाद से जिले में तीसरी लहर पर काबू कर लिया गया।
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फिलहाल, अब जिला अस्पताल से लेकर सीएचसी पर ऑक्सीजन प्लांट से लेकर वेंटिलेटर बेड की उपलब्धता सुनिश्चित हो चुकी है। संभावित चौथी लहर का मुकाबला करने के लिए दवाओं आदि का भरपूर स्टॉक है। इतना ही नहीं, जिले में 4168 लीटर पर मिनट उत्पादन क्षमता के दस ऑक्सीजन प्लांट तैयार हो चुके हैं। वहीं ओयल स्थित मदर एंड चाइल्ड अस्पताल में आरटीपीसीआर जांच लैब भी स्थापित है।

टूटती सांसों को मिलेगी संजीवनी
दूसरी लहर में ऑक्सीजन की कमी के कारण जिला अस्पताल आने वाले मरीजों को भी परेशानी उठानी पड़ी थी, लेकिन अब स्थिति काफी बेहतर है। जिला एवं महिला अस्पताल, मातृ एवं शिशु कल्याण अस्पताल सहित दस ऑक्सीजन प्लांट बनकर तैयार होने के साथ संचालित हैं। या यूं कहें कि ऑक्सीजन की उपलब्धता के मामले में जिला पूरी तरह से आत्मनिर्भर है।
बच्चों से लेकर बड़ों तक के लिए वेंटिलेटर मौजूद
कोरोना महामारी से जंग जीतने के लिए जिले के सरकारी अस्पतालों में ऑक्सीजन बेड की उपलब्धता बढ़कर 700 हो गई है। जिला अस्पताल से लेकर सीएचसी पर में वेंटिलेटर एवं बाईपैप बेड की संख्या करीब 100 है। संभावित चौथी लहर के खतरे को देखते हुए मातृ एवं शिशु कल्याण अस्पताल में 203 बेड तैयार हैं। इसी के साथ गोला, निघासन, पलिया, मोहम्मदी में बच्चों के लिए बेड आरक्षित हैं। वहीं निजी वनबीट अस्पताल को भी आपातकाल स्थिति के लिए रिजर्व में रखा गया है।
दवाओं का है भरपूर स्टॉक
कोरोना की पहली व दूसरी लहर में मरीजों को दवा और इंजेक्शन न मिलने से परेशान होना पड़ा था। मगर, चौथी लहर की संभावना को देखते हुए आवश्यक दवाओं से लेकर इंजेक्शन तक स्टॉक में सुरक्षित कर लिए गए हैं। कोरोना से बचाव के लिए वैक्सीन की भी पर्याप्त उपलब्धता है।
एमसीएच विंग में हो रही आरटीपीसीआर की जांच
कोरोना की दूसरी लहर के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मातृ एवं शिशु कल्याण अस्पताल में आरटीपीसीआर लैब स्थापित करा दी, जिससे जिले में ही जांच कर रिपोर्ट मुहैया कराई जा सके। हालांकि इससे पहले संदिग्ध नमूनों की जांच के लिए सैँपल लखनऊ मेडिकल कॉलेज भेजे जाते थे। जिसकी रिपोर्ट तीन से चार दिन बाद आती थी। मगर, अब दिन के दिन या फिर दूसरे दिन जांच रिपोर्ट मिल जा रही है।
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यहां है इतनी ऑक्सीजन की व्यवस्था
मातृ एवं शिशु कल्याण अस्पताल- 2000 एलपीएम (लीटर प्रति मिनट)
महिला अस्पताल-1000 एलपीएम
जिला अस्पताल-833 एलपीएम
सीएचसी गोला- 333 एलपीएम
सीएचसी फरधान- 167 एलपीएम
सीएचसी मितौली- 167 एलपीएम
सीएचसी नकहा- 167 एलपीएम
सीएचसी पलिया- 167 एलपीएम
सीएचसी निघासन- 167 एलपीएम
सीएचसी मोहम्मदी- 167 एलपीएम
तीसरी लहर में मिले संक्रमित
कुल संक्रमित-5899
स्वस्थ हुए- 5876
कुल जांच -220202

कोरोना महामारी से निपटने के लिए जिले में पर्याप्त इंतजाम हैं। चार सीएचसी पर एल-वन अस्पताल और ओयल स्थित मदर एवं चाइल्ड विंग को एल-टू अस्पताल बनाया गया है। साथ ही सीएचसी पर बच्चों से लेकर बड़ों तक के लिए बेड आरक्षित हैं। कोरोना से बचाव के लिए टीकाकरण अभियान चल रहा है। ऑक्सीजन बेड, वेंटिलेटर एवं ऑक्सीजन प्लांट की उपब्लधता को लेकर जिला बेहद मजबूत स्थिति में हैं। - डॉ. शैलेंद्र भटनागर, सीएमओ
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