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खतरे में लाडो: गुर्दे ने छोड़ा साथ... सांसों की डोर और कमजोर, नाबालिग ने की थी मासूम बच्ची से दरिंदगी की कोशिश

Sat, 27 May 2023 11:34 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर

सार

कानपुर में दरिंदगी की कोशिश का शिकार हुई मासूम बच्ची को पांचवें दिन भी होश नहीं आया। उसके पेट में और चोटें मिली हैं। उसके गुर्दे ने साथ छोड़ दिया है। पड़ोस में रहने वाले नाबालिग ने मासूम से दुष्कर्म का प्रयास किया था।
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सांकेतिक तस्वीर
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विस्तार
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कानपुर में दुष्कर्म के प्रयास की शिकार तीन साल की मासूम के गुर्दे ने काम करना बंद कर दिया है। आईसीयू के वेंटिलेटर पर बेहोश अवस्था में इलाज करा रही मासूम हर सांस के लिए संघर्ष कर रही है। ऑपरेशन के 24 घंटे बाद शुक्रवार को भी उसको होश नहीं आया है। डॉक्टर उसकी हालत गंभीर बता रहे हैं।
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सनिगवां में 22 मई की शाम को अपने घर के बाहर खेल रही बच्ची को पड़ोस की कॉलोनी का नाबालिग लड़का साइकिल से घुमाने के बहाने साथ ले गया था। सूनसान स्थान पर उसके साथ दुुष्कर्म का प्रयास किया। रास्ते से गुजर रही एक महिला के टोकने पर आरोपी मासूम को फेंककर साइकिल लेकर भाग निकला था। 

इससे बच्ची के सिर व पेट में चोट आ गई थी और वह बेहोश हो गई थी। वह हैलट के आईसीयू में भर्ती है। शुक्रवार को पांचवें दिन भी उसे होश नहीं आया है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. यशवंत राव, सर्जरी विभाग की डॉ. श्रद्धा वर्मा, न्यूरो सर्जरी विभाग और स्त्री रोग विभाग की डॉक्टरों की टीम संयुक्त रूप से उसका इलाज कर रही है। 
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गुरुवार को मासूम की फटी आंतों को जोड़ने के लिए डॉ. श्रद्धा वर्मा ने ऑपरेशन किया था। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन ठीक हुआ है, फिर भी उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। मस्तिष्क में चोट की आशंका के चलते उसका सीटी स्कैन कराया गया पर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई।

डॉ. यशवंत ने बताया कि बच्ची की जान बचाने के लिए ब्लड, फ्रेश फ्रोजेन प्लाज्मा चढ़ाने के साथ ही हरसंभव कोशिश की जा रही है। गुर्दे भी फेल हो गए हैं। पेट में और भी चोटें मिली हैं। लगातार निगरानी और प्रयास के बावजूद उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हो रहा है। हालत बहुत गंभीर है।
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परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल, कर रहे दुआ
मासूम बच्ची की गंभीर हालत से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया है। आईसीयू के बाहर टकटकी लगाए परिजन बार-बार डॉक्टरों और नर्सों से बच्ची की हालत पूूछते हैं। शुक्रवार को डॉक्टर, नर्सें उन्हें उम्मीद बंधाने रहे लेकिन बच्ची की हालत देख उनकी आंखों से आंसू निकलते ही रहे। वे बार-बार बच्ची की जान बचाने के लिए दुआ कर रहे हैं। मोहल्ले के लोग भी उन्हें ढांढस बंधाने की कोशिश करते रहे।
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