इसके लिए उसने 2007 में संपत्ति के असल मालिक रहे पाकिस्तानी नागरिक शाहिद हलीम की मृत्यु के बाद पत्नी के नाम फर्जी हिबा दिखाते हुए मालिकाना हक दिखा दिया। साथ ही दारुल मौला और रामजानकी मंदिर वाली संपत्ति को गिरवी भी रख दिया। 2020 तक लोन की एक भी किस्त अदा न करने पर बैंक ने बाबा की पत्नी व बेटियों के नाम खुले लोन अकाउंट को नॉन परफार्मिंग एसेट (एनपीए) घोषित करते हुए कब्जा करने की सूचना जारी कर दी।
इसी के बाद प्रशासन को भी यह सूचना मिली कि बाबा ने बिना एक रुपये खर्च किए ही शत्रु संपत्ति को गिरवी रखकर करोड़ों रुपये हड़प लिए। मामले ने तूल पकड़ा तो बाबा ने विवाद से बचने के लिए मई 2022 में पूरी रकम अदा कर दी। बैंक ने भी विवाद से बचने के लिए मामला सेटेल कर लिया और नो ड्यूज जारी कर दिया।
जिला प्रशासन ने अब इसी मामले में बैंक से पूरी जानकारी मांग ली है। एसडीएम सदर अनुराज जैन ने लोन देने और लोन सेटेल करने के संबंध में पूरे दस्तावेज मांगे हैं। दस्तावेजों की पड़ताल से बाबा का पूरा खेल और साफ हो जाएगा। माना जा रहा है कि इस जांच के बाबा के खिलाफ इस मामले में भी एफआईआर दर्ज हो सकती है।