शिव भक्ति में आगे रहे कई शासकों व समुदायों ने महानगर व उसके आसपास समय- समय पर छोटे-बडे़ शिव मंदिरों के निर्माण कराए हैं, जो आज भी हैं। इनमें एकलिंग शिव के अलावा चतुरानन, पंचानन व सहस्त्रलिंग आदि हैं। भगवान भोलेनाथ के दर्शनों के लिए प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु शिवालयों में आते हैं। यहां आसपास बढ़ी संख्या में मंदिर होने पर शहर को बुंदेलखंड की काशी माना जाता है।
1- नारोशंकर ने बनवाया था किले में शिवालय
महानगर के ऐतिहासिक किले में विराजमान हैं भगवान शिव। ऐतिहासिक मान्यता है कि किले में शिव मंदिर की स्थापना झांसी के प्रथम मराठा शासक सूबेदार नारो शंकर ने करवाया था। इससे लगे क्षेत्र को शंकर गढ़ कहा जाता है। मंदिर के गर्भगृह में काले पाषाण का भव्य शिवलिंग हैं। इसके मुख्य गुंबद के चारों कोनों पर एक-एक लघु मंदिर है। समय-समय पर इस मंदिर को संवारा जाता है। शिवरात्रि पर्व पर यहां भगवान के दर्शनों के लिए लाखों श्रद्धालु जुटते हैं। इस दौरान किला क्षेत्र मेला में तब्दील हो जाता है।
2 - सुख संपदा का आशीष देते हैं हजारिया महादेव
पानी वाली धर्मशाला के हजारिया महादेव मंदिर ऐश्वर्य और सुख संपदा की मनोकामनाएं पूरी करते हैं। गर्भगृह में स्थापित मुख्य विशाल प्रतिमा में सहस्त्र लघु लिंग बने हैं। धार्मिक मान्यता है कि गर्भगृह में प्रतिमा के समक्ष शिव रुद्र कोटि संहिता का पाठ करने से सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। मंदिर निर्माण को लेकर कहा जाता है कि यह गोसाइयों द्वारा बनवाया गया था। सभी छोटे - बडे़ पर्वों पर यहां हजारों की संख्या में भगवान हजारिया महादेव के दर्शन को आते हैं। धार्मिक अनुष्ठान कराते हैं। गर्भगृह में कई देवी देवताओं की भी प्रतिमाएं हैं।
3- यहां ब्रह्मा के सामान हैं शिव
- सैंयर गेट पर भगवान शिव की चतुरानन रूप में भव्य प्रतिमा स्थित है, जो ब्रह्मा के समान चारों दिशा की ओर देख रहे हैं। भगवान शिव की चार मुख वाली प्रतिमाएं गिने चुने शिवालयों में ही देखने को मिलती हैं। यहां पर दूर- दूर से श्रद्धालु भगवान शिव के इस रूप के दर्शन को आते हैं। महा शिवरात्रि पर स्थानीय श्रद्धालुओं द्वारा रात के तीनों प्रहरों में विशेष पूजा व अनुष्ठान कराए जाते हैं। शुक्र यजुर्वेद रूद्रिपाठ भी कराया जाता है। मान्यता है कि इस मंदिर को गोसाइयों ने बनवाया था।
4 - महेश्वर महादेव पर है विशेष आस्था
सदर बाजार के प्राचीन महेश्वर महादेव शिव मंदिर से हर साल शिवरात्रि पर भव्य बारात श्रद्धालुओं द्वारा निकाली जाती है। बारात में भगवान शिव दूल्हा स्वरूप में पालकी में विराजमान रहते हैं। इस मंदिर पर सदर के लोगों की विशेष आस्था है। श्री राम लीला कमेटी सदर द्वारा प्रतिवर्ष भगवान श्री राम की बारात निकाली जाती है। बारात में दूल्हा बने भगवान राम, लक्ष्मण, भरत व शत्रुघन के स्वरूप मंदिर में भगवान शिव के दर्शन करते है। पुजारी चंद्रप्रकाश गोस्वामी और शांतनू पांडेय के अनुसार शिव बारात भ्रमण के बाद रात में विवाह की रस्में हाेंगी।
5 - मठ में हैं पंचमुखी महादेव
मानिक चौक के मठ में पंचमुखी महादेव का मंदिर है। इस शिवालय को बेहद प्राचीन माना जाता है। यह गुसाइयों द्वारा निर्मित है। मठ के पंचमुखी महादेव मंदिर प्रकृति के पंच तत्व जल, वायु, अग्नि, पृथ्वी और आकाश को निरुपित करते हैं। बताते हैं कि मंदिर की वास्तु कला कभी नेपाल के पशुपति नाथ मंदिर से समानता रखती थी। स्थानीय श्रद्धालुओं के अनुसार सावन और शिवरात्रि पर काफी संख्या में श्रद्धालु आते हैं और पूजा अनुष्ठान करते हैं। इनके समक्ष सिर्फ प्रार्थना करने मात्र से ही जीवन की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं।
6- पुष्य नक्षत्र में बना था श्री सिद्धेश्वर मंदिर
ग्वालियर रोड स्थित श्री सिद्धेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण पुष्य नक्षत्र में हुआ था। झांसी के प्रथम सांसद रघुनाथ विनायक धुलेकर ने मंदिर में श्री यंत्र को स्थापित किया था। मान्यता है कि मंदिर में पुष्य नक्षत्र में पूजा आराधना करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। आचार्य हरीओम पाठक ने बताया कि शिवरात्रि पर मंदिर में सुबह 11 बजे पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अभिषेक, मंगला आरती होगी। इसके बाद आम श्रद्धालु पूजा व जलाभिषेक करेंगे। शाम 4 बजे के बाद दूध से अभिषेक, पुष्प श्रृंगार और रात में महाआरती होगी।
7- यह शिवालय भी बसे हैं लोगों के हृदय मेें
महानगर में कई प्राचीन शिवालय हैं, जिनमें भारी संख्या में श्रद्धालु नियमित दर्शन करते है। इनमें झरना गेट स्थित सिंधिया का मंदिर, महाराष्ट्रीयन समाज का गणेश मंदिर से लगा सरदार मुले का शिव मंदिर, बड़ागांव गेट स्थित भगवान भूतनाथ का मंदिर, बाहर बड़ागांव गेट बाहर स्थित सुगंधपुरी के बाग में राजा बाबा महाकालेश्वर मंदिर, छनियापुरा में समाधि मंदिर, शहर कालीबाड़ी स्थित पंचमुखी महादेव मंदिर हैं। शिवरात्रि पर विशेष साज सज्जा व पूजा अनुष्ठान होते हैं।