नगर पालिका प्रशासन अब अपनी आय बढ़ाने में जुट गया है। इसके लिए पालिका प्रशासन ने शहर में स्थित अपनी दुकानों का किराया बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। दुकानों की सूची तैयारी की जा रही है। इसके बाद दुकानों का फिर से आवंटन और किराया तय करने आदि संबंधी कार्य किए जाएंगे। कई साल पहले दुकानों के निर्माण के बाद आवंटित किए जाने के दौरान ही जो किराया निर्धारित किया गया था, वही अभी किराया अब भी लिया जा रहा है। इससे नगर पालिका को प्रतिमाह लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है। इस आय को लेकर पालिका प्रशासन अब गंभीर हो गया है।
नगर पालिका प्रशासन जौनपुर ने अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए शहर में विभिन्न स्थानों पर मौजूद अपनी भूमि पर दुकान बनवाया है। पालिका की शहर में करीब 529 दुकानें हैं। इन दुकानों का आवंटन तत्कालीन समय में निर्माण कार्य के बाद ही किया गया था। उस दौरान दुकानों का जो किराया तय किया था, वही किराया अब भी वसूल किया जा रहा है। उस दौरान प्रति माह किसी दुकान का किराया 100 रुपये तो किसी का 200 रुपये निर्धारित किया गया था। तब और अब में काफी परिवर्तन हो चुका है। इस बीच पुराना किराया वसूल किए जाने से पालिका प्रशासन को सात से आठ लाख रुपये का घाटा हो रहा है। इसे गंभीरता से लेते हुए अब जिम्मेदार इन दुकानों को फिर से आवंटित करने और नए सिरे से किराया तय करने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए दुकानों व दुकानवार मिलने वाले किराया आदि का ब्योरा जुटाया जा रहा है। सूची तैयार करने के बाद फिर से दुकानों का आवंटन व वर्तमान समय के हिसाब से किराया तय किया जाएगा।
अपर जिलाधिकारी भू राजस्व राज कुमार द्विवेदी का कहना है कि दुकानों का नये सिरे आवंटित करने और वर्तमान समय के हिसाब से किराया तय करने का कार्य शीघ्र ही किया जाएगा। इसकी तैयारी की जा रही है। दुकानों के निर्माण के बाद आवंटन के समय जो किराया निर्धारित किया गया था, वही किराया अब भी वसूल किया जा रहा है। इसके चलते नगर पालिका को लाखों रुपये राजस्व का नुकसान हो रहा है। इसे गंभीरता से लेकर यह कदम उठाया जा रहा है।
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इन जगहों पर हैं पालिका की दुकानें
जौनपुर। शहर के लालबहादुर शास्त्री मार्केट, इंदिरा मार्केट, सब्जी मंडी, कोतवाली चौराहे आदि स्थानों पर नगर पालिका की अपनी दुकानें हैं। इन स्थानों पर कुल 529 दुकानों के निर्माण किए गए हैं। जिन लोगों को दुकान आवंटित हैं, उनसे किराया वसूल किया जा रहा है।