ललही छठ पर्व पर महिलाओं ने व्रत रखकर पुत्र के दीर्घायु के लिए छठ माता का पूजन किया है। कुछ महिलाओं ने पुत्र प्राप्ति की कामना के लिए भी व्रत रखकर पूजा की। भादो मास की षष्ठी तिथि को मंदिर अथवा नदी व सरोवर के किनारे गोट बनाकर ललही छठ माता का पूजन विधि विधान से किया। इस दौरान महुआ, तिन्नी का चावल, करेमुआ का साग, दही व कच्चा दूध मिलाकर पराश के पत्तों पर प्रसाद वितरित किया।
शहर के अलावा मछलीशहर, खेतासराय, जलालपुर, मडियाहूं, बदलापुर, बरसठी, रामपुर, शाहगंज, केराकत सहित जिलेभर में जगह-जगह महिलाओं में अपने पुत्रों की लंबी आयु की कामना करते हुए शनिवार को छठ माता की विधि-विधान से पूजा की। प्रात: काल स्नान आदि से निवृत्त होकर दीवार पर गोबर से हरछठ का चित्र बनाया। इसमें गणेश-लक्ष्मी, शिव-पार्वती, सूर्य-चंद्रमा, गंगा-जमुना आदि के चित्र बनाया। इसके बाद हरछठ के पास कमल के फूल, छूल के पत्ते व हल्दी से रंगा कपड़ा भी रखें। इस पूजा में सतनजा यानी कि सात प्रकार का भुना हुआ अनाज चढ़ाया गया। इसमें भूने हुए गेहूं, चना, मटर, मक्का, ज्वार, बाजरा, अरहर आदि शामिल थे। फिर, हलषष्ठी माता की कथा को महिलाओं ने सुनाया।