मुहम्मदाबाद। पढ़े लिखे शिक्षित युवा अब खेती किसानी में अपना भविष्य संवार रहे है। जिला मुख्यालय उरई से आठ किलोमीटर दूर स्थित कुसमिलिया गांव निवासी गीतेश राजपूत ने बीएड की शिक्षा पूरी की। इसके बाद भी उन्होंने स्कूलों में पढ़ाने के बजाए खेती किसानी की ठानी। उन्होंने पारंपरिक चना, मटर, मसूर की खेती से हटकर ताइवानी पपीता व कश्मीरी बेर लगाया और अब अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।
गीतेश के मुताबिक वे लखनऊ से ताइवान रेडलेडी 786 एल 15 पपीते का बीज और थाइ एप्पल व कश्मीरी बेर के सौ-सौ ग्राम बीज 38,600 रुपये में लाते हैं। जिन्हें दो माह घर के आंगन में प्राथमिक प्रजनन प्रक्रिया के बाद खेतों में पौधे के रूप में लगाया जाता है। खेतों में ताइवानी पपीते के बीच में उन्होंने कश्मीरी बेर भी लगा रखे हैं। बताया कि आठ महीने में पेड़ बड़ा आकार ले लेते हैं। इसमें एक पेड़ से 50 से 60 किलो तक फल निकलते हैं। जिन्हें बेचकर मुनाफा उठा रहे हैं। बताया कि सर्दी व गर्मी के दो-दो महीने छोड़कर बाकी के पूरे साल बेर व पपीते उगाया जा सकता है। पपीते की पैदावार आठ माह में पूरी हो जाती है। गीतेश के मुताबिक मटर की खेती में प्रति बीघा करीब 8 से 10 हजार रुपये की लागत आती है। जबकि मुनाफा कम होता है। पर बेर और पपीते की पैदावार में लागत यदि 25 से 30 हजार की आएगी तो मुनाफा भी ढाई से तीन लाख यानी 10 गुना होता है। गीतेश ने बताया कि गांव व आसपास के कुछ अन्य गांवों के किसान भी अब पपीते व बेर की पैदावार कर रहे हैं।