हमीरपुर। आपरेशन कायाकल्प में करोड़ों का बजट पंचायती राज विभाग ने खपा दिया, इसके बाद भी ज्यादातर परिषदीय स्कूल चमक नहीं पाए हैं। स्कूलों की काया धुंधली ही दिख रही है। कहीं बाउंड्रीवाल तो कहीं दिव्यांग शौचालय गायब हैं। वहीं रसोईघर, स्टोर रूम भी दुरुस्त नहीं हो पाए हैं। जनपद में कुल 933 परिषदीय स्कूल संचालित हैं। सभी स्कूलों को कायाकल्प योजना के जरिए चमकाया जाना है।
कायाकल्प के तहत 14वें राज्य वित्त के बजट से खामियां दूर की जानी हैं। योजना को बेसिक शिक्षा व पंचायतीराज विभाग के समन्वय से 31 मार्च 2021 तक पूरा होना था। इन स्कूलों में मध्यम व गरीब परिवारों के लाखों बच्चे पढ़ने जाते हैं। बेसिक शिक्षा विभाग के 75 फीसदी स्कूलों में कायाकल्प योजना के तहत काम पूरे हो चुके हैं। गोहांड ब्लाक के 122 परिषदीय स्कूल संचालित हैं। कुरारा में 124, मौदहा में 169, मुस्करा में 111, राठ में 108, सरीला में 143 व सुमेरपुर में 156 स्कूल संचालित है। जिनमें 902 स्कूलों में ब्लैकबोर्ड, 805 स्कूलों में किचेन शेड, 871 स्कूलों में रंगाई व पुताई का काम पूरा किया जा चुका है। वहीं 809 स्कूलों में रैप की व्यवस्था पूरी हो चुकी है। 833 स्कूलों में इलेक्ट्रिक कनेक्शन व 687 स्कूलों में वाउंड्रीवाल पूरी हो चुकी हैं।
सिर्फ 77 स्कूलों में बैठने के लिए फर्नीचर
933 परिषदीय स्कूलों में केवल 77 स्कूलों में बच्चों के बैठने के लिए फर्नीचर की व्यवस्था हो सकी है। वहीं 160 कक्षाओं में टाइल्स का काम पूरा हो सका है। जबकि 847 स्कूलों में पेयजल व्यवस्था हुई है। बालिका शौचालय 845 व बालक शौचालय 714 तैयार बताए जा रहे हैं।
19 मानकों पर चमकने हैं स्कूल
कायाकल्प योजना में 19 मानकों पर स्कूलों में काम होने थे। जिसमें बालक व बालिकाओं के लिए अलग-अलग प्रसाधन, कक्ष की फर्श पर टाइल्स, रसोईघर का निर्माण, प्रसाधनों में जलापूर्ति, शुद्ध पेयजल की व्यवस्था, कक्षा में श्यामपट, विद्यालय की रंगाई, पुताई, मल्टीपल हैंडवॉश यूनिट, कक्षा व कक्ष में उपयुक्त विद्युत वायरिंग व विद्युत उपकरण, दिव्यांग बच्चों के लिए रैप और शौचालय भी बनवाना था। स्कूल की बाउंड्री, स्टोर रूम आदि के कार्य होने थे।
मैदान में नहीं हुई मिट्टी की पुराई
सिमनौड़ी गांव निवासी ऊदल सिंह ने बताया उच्च प्राथमिक विद्यालय की बाउंड्री अभी पूरी नहीं हुई है। स्कूल भवन से मैदान बहुत नीचे है। जिसमें मिट्टी की पुराई भी नहीं की गई है। स्कूल भवन की रंगाई व पुताई भी नहीं कराई गई है। दिव्यांगों के लिए रैप व शौचालय नहीं बने हैं। प्रसाधनों में जलापूर्ति की कोई व्यवस्था नहीं हो सकी है।
स्कूल के अंदर से निकला नाला
प्राथमिक स्कूल कारीमाटी का भवन जर्जर अवस्था में है। मल्टीपल हैंडवॉश भी नहीं है। दिव्यांग बच्चों के लिए शौचालय नहीं बना और न ही प्रसाधनों में जलापूर्ति की व्यवस्था है। विद्युत वायरिंग समेत कई कार्य शेष हैं। प्रधानाध्यापिका रमा सिंह ने कहा कायाकल्प के तहत स्कूल में कार्य चल रहा है। बताया सबसे बड़ी दिक्कत स्कूल के अंदर से निकलने वाले नाला के कारण होती है। जो स्कूल बाउंड्री के अंदर से निकाला गया है। जिसमें पूरे गांव का मलमूत्र बह कर आता है। जिससे गंदगी फैलती है।
नहीं बनी स्कूल की बाउंड्रीवाल
प्राथमिक विद्यालय कंजौली डेरा की भी स्थिति किसी से छिपी नहीं है। अभी तक स्कूल में चहारदीवारी का निर्माण नहीं हो पाया है। स्कूल भवन के सामने गड्ढों में गंदा पानी भरा है। चारों तरफ घास खड़ी है। विद्यालय की रंगाई व पुताई नहीं कराई गई है। शौचालयों का निर्माण भी नहीं हुआ है। न ही विद्युतीकरण कराया गया है। रसोईघर व स्टोर रूम भी गायब हैं। जिससे नौनिहालों का भविष्य दांव पर लगा है।
वर्जन
कायाकल्प के तहत स्कूल की रंगाई व पुताई व टाइल्स आदि के कार्य कराए गए हैं। शौचालय पुराने बने हैं। रसोईघर अभी बना नहीं है। स्टोर रूम भी नहीं है। किसी तरह काम चल रहा है। -रंजना विश्वकर्मा, प्रधानाध्यापिका, उच्च प्राथमिक विद्यालय पत्योरा
परिषदीय विद्यालयों में कायाकल्प योजना के तहत 14वें वित्त व राज्य वित्त से स्कूलों का 19 बिंदुओं पर कायाकल्प किया जाना था। जिसमें अभी 75 फीसदी काम हो गया है। शेष कार्यों को जल्द कराए जाने की प्रक्रिया तेज है। कहा ये सभी कार्य पंचायती राज विभाग की देखरेख में हो रहे हैं। - सतीश कुमार, बेसिक शिक्षा अधिकारी