गोरखपुर। सूद कारोबार के नाम पर जिले में मनमानी की जा रही है। नियम है कि मूल रकम पर सालाना 14 फीसदी ब्याज वसूला जाए लेकिन सूद पर रुपये देने वाले सालाना 120 फीसदी तक ब्याज वसूल रहे हैं। मूल तो मूल ब्याज चुकाना भारी। जाहिर है, जिसने एक बार इनसे कर्ज लिया वह जीवन भर चुकाता रहे।
जिले में 448 पंजीकृत साहूकार हैं। यही साहूकार ही ब्याज पर ऋण दे सकते हैं। इसके ब्याज दर निर्धारित हैं। सालाना 14 फ ीसदी ब्याज पर ही ऋण दिया जा सकता है। इससे ज्यादा ब्याज वसूली की छूट नहीं है। ऐसी शिकायत मिली तो सूद कारोबारी का लाइसेंस निलंबित किया जा सकता है। एडीएम (फाइनेंस) को कार्रवाई का अधिकार है। लेकिन सारे नियम-कायदे सिर्फ कागजों में हैं। इससे कई कर्जदार जान दे चुके है।
1976 में बना था यूपी साहूकारी विनियम अधिनियम
जब छोटे कारोबारियों को बैंक से लोन लेने में परेशानी होती थी, तब राज्य सरकार ने यूपी साहूकारी विनियम कानून 1976 पास कराया। इसका उद्देश्य इलाके के साहूकारों को छोटे कारोबारियों व जरूरतमंदों की मदद करने के लिए कानूनी संरक्षण देना था।
जिला प्रशासन जारी करता है लाइसेंस
सूद पर रुपये देने के कारोबार का लाइसेंस जिला प्रशासन देता है। इसका नवीनीकरण एडीएम (फाइनेंस) दफ्तर करता है जिसकी फीस 15 रुपये है।
‘सूदखोरों की शिकायत के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी हो’
जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राकेश यादव ने सोमवार को एसएसपी को ज्ञापन देकरसूदखोरों के उत्पीड़न से लोगों को बचाने के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी करने की मांग की है। कहा कि मृतक रमेश गुप्ता के बेटे को आर्थिक सहायता के साथ सुरक्षा भी दी जाए। उनके साथ महेंद्र मोहन तिवारी, संजय चौबे, राजेंद्र यादव, अनिल सोनकर, प्रो. रामनरेश चौधरी, प्रह्लाद कुशवाहा, त्रिवेणी गांधी आदि भी थे।