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चौरीचौरा कांड के शहीदों को किया गया नमन

Tue, 05 Feb 2019 12:42 AM IST
ajay Kumar अमर उजाला/गाोरख्ापुर
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ध्वजारोहण के बाद दिया गया गार्ड ऑफ ऑनर। - फोटो : amar ujala
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चौरीचौरा/सरदारनगर। स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा देने वाले चौरीचौरा कांड के शहीदों को सोमवार को श्रद्धांजलि दी गई। शहीद स्मारक परिसर में आयोजित कार्यक्रम में चौरीचौरा के शहीदों की शौर्य गाथा पर प्रकाश डाला गया। दोपहर के दो बजे शहीद स्मारक पर ध्वजारोहण किया गया। उसके बाद पुलिस ने शहीदों को गार्ड ऑफ ऑनर दिया।
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चार फरवरी 1922 को चौरीचौरा कांड हुआ था। हर साल चार फरवरी को शहीदों की याद में कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। सोमवार को हुए कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व सांसद श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी ने कहा कि चौरीचौरा वीर सपूतों की धरती है। यहां के लोगों ने क्रांति की जो मशाल जलाई थी, उसका प्रकाश पूरे देश में फैला। अवकाश प्राप्त लेफ्टिनेंट जनरल श्रीप्रकाश मणि ने कहा कि देश को आजाद कराने के लिए चौरीचौरा के लोगों ने अपने प्राणों की भी परवाह नहीं की। उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। स्मारक समिति के वरिष्ठ उपाध्यक्ष तथा जेबी महाजन डिग्री कॉलेज के प्रबधंक ईश्वरचंद्र जायसवाल ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को अपने पूर्वजों के शौर्य को भूलना नहीं चाहिए। चौरीचौरा के लोगों ने ब्रिटिश हुकूमत को हिलाकर रख दिया था।

कार्यक्त्रस्म की अध्यक्षता उपजिलाधिकारी सरनीत कौर ब्रोका ने की। कार्यक्रम के आयोजक रामनरायन त्रिपाठी ने लोगों के प्रति आभार जताया। संचालन गणेश दत्त शुक्ल ने किया। नगर पंचायत मुंडेरा बाजार के पूर्व चेयरमैन ज्योति प्रकाश गुप्ता, पुलिस क्षेत्राधिकारी योगेंद्र कृष्ण नारायण, तहसीलदार रत्नेश त्रिपाठी, एसओ नीरज राय, राकेश त्रिपाठी, राजन मद्धेशिया, सत्येंद्र कुमार पांडेय, ओम प्रकाश पांडेय, स्वतंत्रा संग्राम सेनानी परिजन समिति के सदस्य और पदाधिकारी मौजूद रहे। इसके पूर्व भारत माता के चित्र पर पुष्प अर्पित कर कार्यक्रम की शुरुआत की गई। सेंट्रल एकेडमी स्कूल में बच्चों ने देश भक्ति गीत प्रस्तुत किए। लोगों ने बच्चों के कार्यक्रम की सराहना की।

पुलिस की बर्बरता से गुस्साए लोगों ने फूंक दिया था थाना

चार फरवरी 1922 को विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार व नशीले पदार्थों का विरोध कर रहे सत्याग्रहियों पर पुलिस टूट पड़ी थी। पुलिस की बर्बरता का लोगों ने विरोध किया तो उन पर गोलियां चलाई गईं। कुछ सत्याग्रहियों की मौत हो गई, जबकि पचास से अधिक लोग घायल हो गए थे। उससे लोगों का गुस्सा भड़क गया। गोलियां खत्म होने के बाद पुलिसकर्मी थाने में छिप गए। भीड़ ने थाने को आग के हवाले कर दिया था। तत्कालीन थानेदार गुप्तेश्वर सिंह सहित 20 पुलिसकर्मियों और तीन चौकीदारों की जलकर मौत हो गई थी। उसी दिन लोगों ने चौरीचौरा के रेलवे स्टेशन और डाकघर पर तिरंगा फहरा दिया था। हालांकि इस घटना से महात्मा गांधी इतने आहत हुए कि उन्होंने असहयोग आंदोलन को स्थगित करने का निर्णय ले लिया था।
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