चित्रकूट। दहेज हत्या के मामले में अदालत ने पति को आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है। साथ ही ससुर को भी सात वर्ष सश्रम कारावास और अर्थदंड से दंडित किया है।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी गोपाल दास ने बताया कि मोतीलाल निवासी ग्राम भुइहरी ने पुत्री बदमिया उर्फ सुनीता की शादी खोह थाना कोतवाली कर्वी निवासी हनुमान के पुत्र जुग्गीलाल से की थी। उसका आरोप है कि शादी के कुछ दिन बाद से ही ससुराल के लोगों ने दहेज के लिए उसके साथ मारपीट और प्रताड़ना शुरू कर दी।
मोतीलाल का कहना था कि 14 जुलाई 2015 को सुनीता ने उसे फोन से बताया कि ससुराल के लोग उसके साथ मारपीट कर रहे हैं। इसके बाद फोन कट गया। वह ससुराल जा रहा था कि किसी अनजान ने उसे फोन किया कि उसकी बेटी को मार डाला गया। जब वह ससुराल पहुंचा तो वहां उसकी बेटी मृत पड़ी थी। उसके शरीर पर कई घाव थे। इस पर उसने कोतवाली में ससुराल वालों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी।
अधिवक्ता के अनुसार विवेचना के बाद पुलिस ने आरोपियों जुग्गीलाल और हनुमान के खिलाफ आरोप पत्र कोर्ट में भेजा गया। शनिवार को अपर सत्र न्यायाधीश (एफटीसी) सत्येंद्र प्रकाश पांडेय ने जुग्गीलाल को दहेज हत्या का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास और बीस हजार रुपये जुर्माने की सजा दी है। मृतका के ससुर हनुमान को दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत सात वर्ष का कठोर कारावास और दस हजार रुपये का अर्थदंड दिया है।