परिजनों ने उसे तत्काल रसड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। देवांश जन्म से गूंगा और बहरा था। अगर बोल पाता तो शायद उसकी जान बच जाती। परिजनों ने आरोप लगाया कि मकान मालिक के अंडरग्राउंड की बैरिकेडिंग के लिए कई बार कहा जा चुका था। अगर बैरिकेडिंग हुई होती तो बालक की मौत नहीं होती। सूचना के बाद पहुंची पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है। मासूम की मौत से परिजनों में कोहराम मचा है।