जिले के जोया निवासी डॉ. गौतम की बेटी अंशिका यूक्रेन का बॉर्डर पार करके रोमानिया पहुंचने में सफल हो गई है। उसके स्वदेश वापसी की संभावना बढ़ने से परिजनों ने राहत महसूस की है, लेकिन इस राहत के बीच अंशिका ने बॉर्डर पर पीछे छूटे अन्य छात्र-छात्राओं पर यूक्रेनी पुलिस की ओर से आफत टूटने के दावे के साथ वीडियो जारी की है।
डॉ. गौतम ने बताया कि अंशिका द्वारा भेजी गई लगभग 29 सेकेंड की वीडियो क्लिप में यूक्रेन की पुलिस उन छात्र-छात्राओं पर बेरहमी से डंडे बरसाती नजर आ रही है, जो यूक्रेन का बॉर्डर पार नहीं कर सके थे।
वीन्नित्स्या मेडिकल यूनिवर्सिटी की एमबीबीएस तृतीय वर्ष की छात्रा अंशिका का दावा है कि यूनिवर्सिटी से सौ भारतीय विद्यार्थी दो बसों में सवार होकर शनिवार की दोपहर रोमानिया के लिए निकले थे। रविवार भोर में वह (अंशिका) और गाजियाबाद तथा नोएडा की एक-एक छात्रा बॉर्डर पार करके रोमानिया पहुंच गईं। इस बीच पीछे छूटे 97 विद्यार्थियों पर यूक्रेन की पुलिस ने अचानक डंडे बरसाने शुरू कर दिए। कोई कारण बताए बिना उन्हें बुरी तरह पीटा। छात्राओं के चिल्लाने की आवाजों को नजरअंदाज करते हुए सभी को पीछे खदेड़ दिया।
मुरादाबाद मंडल के 4 जिलों के 9 छात्र घर पहुंचे
मुरादाबाद। गुरुवार को रूस के हमले के बाद से यूक्रेन में संघर्ष और हताशा भरी जिंदगी का सामना कर रहे भारतीय छात्रों की घर वापसी का सिलसिला शुरू हो गया है। रविवार को दिल्ली पहुंची फ्लाइट से आने वाले छात्रों में मंडल के 4 जिलों के 9 छात्र शामिल हैं। इनमें मुरादाबाद के गांव गोदी हमीरपुर के इमरान, अमरोहा के गजरौला क्षेत्र के गांव कटाई का सुहेल, रामपुर के गांव खेड़ा टांडा के सुभान, संभल के रुकनुद्दीन सराय के मो. फैजान अशरफ, मो. फिरोज, राया बुजुर्ग के अब्दुल बरकात, सदीरनपुर के शाकिब, चंदौसी के वैभव गुप्ता, शशांक वार्ष्णेय के घर पहुंचते ही परिवारों में खुशी की लहर दौड़ गई। ब्यूरो
माइनस पांच डिग्री तापमान में तीन दिन से बेसमेंट में छुपे हैं रामपुर के छात्र छात्राएं
यूक्रेन में फंसे रामपुर के छात्र छात्राओं का बुरा हाल है। माइनस पांच डिग्री सेल्सियस तापमान में बच्चे हॉस्टल के ही बेसमेंट में छुपे हैं। तीन दिन से बाहर नहीं निकले हैं। अब उनके खाने-पीने का सामान भी खत्म होने लगा है। 28 फरवरी तक बाहर न निकलने की चेतावनी दी गई है। चारों तरफ से बमबारी और मिसाइलें फटने की आवाज आ रही हैं। वहां दहशत और डर का माहौल है। यह सुनकर बच्चों के परिजनों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
ज्वालानगर के मुदित राजपूत यू्क्रेन की खारकीव नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं। उनके पिता प्रेम सिंह ने बताया कि तीन दिन से मुदित राजपूत अपने साथियों के साथ हॉस्टल के बेसमेंट में ही छुपा है। रविवार को दोपहर बात हुई, तो मुदित ने बताया कि उन्हें 28 फरवरी तक बाहर न निकलने के लिए कहा गया है। अब यहां खाने पीने की दिक्कत भी हो रही है। सिर्फ एक चॉकलेट के भरोसे ही वक्त काटा जा रहा है। सर्दी बहुत अधिक है। बिजली भी बंद कर दी जाती है। पीने का पानी भी खत्म हो रहा है। बाहर से बम धमाकों और मिसाइलों के धमाकों की आवाजें आ रही हैं।
उन्होंने बताया कि यू्क्रेन में कुछ रूस के जवान सादा ड्रेस में घूम रहे हैं, जिस वजह से हर तरफ डर और दहशत का माहौल है। अठभैयान घेर सैफुद्दीन निवासी शजा उस्मान की मां समीना नादिर बताती हैं कि बच्चों का बहुत बुरा हाल है। उनके पास खाने-पीने का सामान भी खत्म हो गया है। बाहर निकलने की अनुमति नहीं है। हर तरफ बारूद ही बरस रहा है। एक मिनट के अंतराल पर धमाके हो रहे हैं। उन्होंने सरकार से मदद की गुहार लगाई है। जबकि, ज्वालानगर निवासी अनुज कुमार रोमानिया में पहुंच चुके हैं और आगामी दो से तीन दिन में देश लौट सकते हैं। बच्चों के फंसने की वजह से परिजनों की चिंताएं बढ़ी हुई हैं।