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Ukraine Crisis : यूक्रेन बॉर्डर पार करने में सफल रही अंशिका, कहा-अन्य विद्यार्थियों पर टूट पड़ी पुलिस

Mon, 28 Feb 2022 02:10 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अमरोहा

सार

इस राहत के बीच अंशिका ने बॉर्डर पर पीछे छूटे अन्य छात्र-छात्राओं पर यूक्रेनी पुलिस की ओर से आफत टूटने के दावे के साथ वीडियो जारी की है। डॉ. गौतम ने बताया कि अंशिका द्वारा भेजी गई लगभग 29 सेकेंड की वीडियो क्लिप में यूक्रेन की पुलिस उन छात्र-छात्राओं पर बेरहमी से डंडे बरसाती नजर आ रही है, जो यूक्रेन का बॉर्डर पार नहीं कर सके थे। 
 
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रोमानिया सीमा पर छात्रों का जमावड़ा... - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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जिले के जोया निवासी डॉ. गौतम की बेटी अंशिका यूक्रेन का बॉर्डर पार करके रोमानिया पहुंचने में सफल हो गई है। उसके स्वदेश वापसी की संभावना बढ़ने से परिजनों ने राहत महसूस की है, लेकिन इस राहत के बीच अंशिका ने बॉर्डर पर पीछे छूटे अन्य छात्र-छात्राओं पर यूक्रेनी पुलिस की ओर से आफत टूटने के दावे के साथ वीडियो जारी की है।

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डॉ. गौतम ने बताया कि अंशिका द्वारा भेजी गई लगभग 29 सेकेंड की वीडियो क्लिप में यूक्रेन की पुलिस उन छात्र-छात्राओं पर बेरहमी से डंडे बरसाती नजर आ रही है, जो यूक्रेन का बॉर्डर पार नहीं कर सके थे। 

वीन्नित्स्या मेडिकल यूनिवर्सिटी की एमबीबीएस तृतीय वर्ष की छात्रा अंशिका का दावा है कि यूनिवर्सिटी से सौ भारतीय विद्यार्थी दो बसों में सवार होकर शनिवार की दोपहर रोमानिया के लिए निकले थे। रविवार भोर में वह (अंशिका) और गाजियाबाद तथा नोएडा की एक-एक छात्रा बॉर्डर पार करके रोमानिया पहुंच गईं। इस बीच पीछे छूटे 97 विद्यार्थियों पर यूक्रेन की पुलिस ने अचानक डंडे बरसाने शुरू कर दिए। कोई कारण बताए बिना उन्हें बुरी तरह पीटा। छात्राओं के चिल्लाने की आवाजों को नजरअंदाज करते हुए सभी को पीछे खदेड़ दिया। 
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मुरादाबाद मंडल के 4 जिलों के 9 छात्र घर पहुंचे
मुरादाबाद। गुरुवार को रूस के हमले के बाद से यूक्रेन में संघर्ष और हताशा भरी जिंदगी का सामना कर रहे भारतीय छात्रों की घर वापसी का सिलसिला शुरू हो गया है। रविवार को दिल्ली पहुंची फ्लाइट से आने वाले छात्रों में मंडल के 4 जिलों के 9 छात्र शामिल हैं। इनमें मुरादाबाद के गांव गोदी हमीरपुर के इमरान, अमरोहा के गजरौला क्षेत्र के गांव कटाई का सुहेल, रामपुर के गांव खेड़ा टांडा के सुभान, संभल के रुकनुद्दीन सराय के मो. फैजान अशरफ, मो. फिरोज, राया बुजुर्ग के अब्दुल बरकात, सदीरनपुर के शाकिब, चंदौसी के वैभव गुप्ता, शशांक वार्ष्णेय के घर पहुंचते ही परिवारों में खुशी की लहर दौड़ गई। ब्यूरो

माइनस पांच डिग्री तापमान में तीन दिन से बेसमेंट में छुपे हैं रामपुर के छात्र छात्राएं
यूक्रेन में फंसे रामपुर के छात्र छात्राओं का बुरा हाल है। माइनस पांच डिग्री सेल्सियस तापमान में बच्चे हॉस्टल के ही बेसमेंट में छुपे हैं। तीन दिन से बाहर नहीं निकले हैं। अब उनके खाने-पीने का सामान भी खत्म होने लगा है। 28 फरवरी तक बाहर न निकलने की चेतावनी दी गई है। चारों तरफ से बमबारी और मिसाइलें फटने की आवाज आ रही हैं। वहां दहशत और डर का माहौल है। यह सुनकर बच्चों के परिजनों की चिंताएं बढ़ गई हैं।

ज्वालानगर के मुदित राजपूत यू्क्रेन की खारकीव नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं। उनके पिता प्रेम सिंह ने बताया कि तीन दिन से मुदित राजपूत अपने साथियों के साथ हॉस्टल के बेसमेंट में ही छुपा है। रविवार को दोपहर बात हुई, तो मुदित ने बताया कि उन्हें 28 फरवरी तक बाहर न निकलने के लिए कहा गया है। अब यहां खाने पीने की दिक्कत भी हो रही है। सिर्फ एक चॉकलेट के भरोसे ही वक्त काटा जा रहा है। सर्दी बहुत अधिक है। बिजली भी बंद कर दी जाती है। पीने का पानी भी खत्म हो रहा है। बाहर से बम धमाकों और मिसाइलों के धमाकों की आवाजें आ रही हैं।

उन्होंने बताया कि यू्क्रेन में कुछ रूस के जवान सादा ड्रेस में घूम रहे हैं, जिस वजह से हर तरफ डर और दहशत का माहौल है। अठभैयान घेर सैफुद्दीन निवासी शजा उस्मान की मां समीना नादिर बताती हैं कि बच्चों का बहुत बुरा हाल है। उनके पास खाने-पीने का सामान भी खत्म हो गया है। बाहर निकलने की अनुमति नहीं है। हर तरफ बारूद ही बरस रहा है। एक मिनट के अंतराल पर धमाके हो रहे हैं। उन्होंने सरकार से मदद की गुहार लगाई है। जबकि, ज्वालानगर निवासी अनुज कुमार रोमानिया में पहुंच चुके हैं और आगामी दो से तीन दिन में देश लौट सकते हैं। बच्चों के फंसने की वजह से परिजनों की चिंताएं बढ़ी हुई हैं।

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धमाकों की दहशत के बीच भूखे-प्यासे हॉस्टल के बेसमेंट में छुपे हैं छात्र 

यूक्रेन में फंसे क्षेत्र के तीन छात्रों संदीप सिंह, सलमान अली, फुरकान अली के परिजन बेहद परेशान हैं। संदीप यूक्रेन से निकलकर रोमानिया के हवाई अड्डे पर पहुंच गया है। जबकि सलमान और फुरकान यूक्रेन के हॉस्टल के बेसमेंट में ही भूखे प्यासे छुपे हुए हैं। इन दोनों छात्रों के सामने दहशत भरे माहौल में अब खाने-पीने का सामान जुटाने की भारी दिक्कतें पैदा होने लगी हैं। चारों तरफ से बम और मिसाइलों की आवाज आ रही हैं। बच्चों की फोन पर आवाज सुनकर परिजन चिंतित हैं। 

ग्राम मनकरा का मजरा निवासी छात्र सलमान अली व फुरकान अली यूक्रेन की सूमी यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं। यूक्रेन में हुए हमलों के बाद दोनों छात्र अपने तमाम साथियों के साथ अलग-अलग हॉस्टल के बेसमेंट में छुपे हुए हैं।  परिजनों का कहना है कि उनके बच्चों ने उन्हें बताया कि अब उनके सामने खाने-पीने का सामान भी खत्म होता जा रहा है और बाहर भारी गोलाबारी और धमाकों की भारी दहशत है। ऐसे में कोई भी उनकी मदद नहीं हो पा रही है।  परिजनों का आरोप है कि भारतीय दूतावास से भी उनके बच्चों को कोई खास मदद नहीं मिल पा रही है। शनिवार की रात उनकी अपने पुत्रों से बात हुई थी।

मगर, रविवार को नेटवर्क न मिलने की वजह से संपर्क नहीं हो पा रहा है। वह सभी अपने बच्चों को लेकर बेहद दु:खी हैं।  वहीं, ग्रीन पार्क कॉलोनी निवासी संदीप सिंह के पिता सुखविंदर सिंह ने बताया कि उनका पुत्र अपने करीब 50 सहपाठियों के साथ निजी बस से यात्रा करके  रोमानिया के एयरपोर्ट पर पहुंच गया है। उनके पुत्र ने कहा है कि वह उन्हें फोन न करें। नेटवर्क मिलने पर वह स्वयं ही उनसे बात कर लेगा। उसने स्वयं वह अपने साथियों को पूरी तरह से सुरक्षित बताया है। 

बस चालक ने वसूले दस-दस हजार रुपये
बिलासपुर : ग्राम पट्टी बसंतपुर निवासी राजेंद्र शर्मा का पुत्र संजय दत्त शर्मा तीन दिन पूर्व यूक्रेन के विन्नित्सिया शहर से अपने चार साथियों के साथ अपने घर लौट आया है। संजय शर्मा ने रविवार को बताया कि उसके पास उसके दोस्तों के फोन आ रहे हैं। शनिवार की शाम उसने अपनी यूनिवर्सिटी के परिचित एक बस चालक से फोन पर बात करके अपने पांच साथियों को विन्नित्सिया से रोमानिया  के लिए भिजवाया है। संजय का कहना है कि बस चालक ने प्रति छात्र से 10-10 हजार रुपये किराए के रूप में वसूले हैं। संजय ने बताया कि उसके दोस्तों का कहना है कि यूक्रेन और रोमानिया बॉर्डर पर छात्र हाथ में तिरंगा लेकर पहुंच रहे हैं। मगर,  तापमान माइनस 5 डिग्री सेल्सियस होने और सभी छात्रों को ठहरने की कोई व्यवस्था न होने की वजह से खुले में बेहद परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खाने पीने की बेहद परेशानी है। उन्होंने यूक्रेन सरकार पर कोई सहयोग छात्रों का न करने का भी आरोप लगाया है। 

यूक्रेन में फंसा नदीम पोलैंड पहुंचा
यूक्रेन की राजधानी कीव में फंसा क्षेत्र के खौदकलां गांव निवासी नदीम खां के पोलैंड की सीमा में पहुंचने की सूचना मिलने से परिवार के लोगों में राहत महसूस की है। सब कुछ सही रहा तो अगले कुछ दिनों में वह वतन वापस आ सकता है।

नदीम खां फरवरी 2020 में यूक्रेन की राजधानी कीव में है। वह इंटरनेशनल योरोपियन यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है, जहां उसका दूसरा साल है। खौदकलां और मझरा हसन गांव के अलावा खेड़ा टांडा के तीन छात्र अभी वहीं फंसे हुए हैं। खौदकलां के छात्र ने अपने परिजन को सूचना दी कि वह पोलैंड के भीतर प्रवेश कर गया है, जहां से फ्लाइट पकड़कर वह एक-दो दिन के भीतर वतन लौट आएगा। उसके द्वारा दी गई इस जानकारी से मां रिजवाना बेगम, भाई जैद खां, बहन इरम और स्वार मामा दासिम पठान समेत अनेक रिश्तेदारों ने राहत महसूस की है।

बिना सोए गुजारीं रात, तब हाथ आई घर की सौगात
यूक्रेन में फंसा खेड़ा टांडा निवासी छात्र सुभान अली रविवार शाम घर पहुंच गया। उसे अपने सामने देख परिवार के सदस्य भावुक हो गए। परिवार के अलावा दोस्तों ने गले लगाया और हार पहनाकर स्वागत किया। 

अजीमनगर थाना क्षेत्र के खेड़ा टांडा गांव निवासी जलीस अहमद के पुत्र सुभान ने बताया कि वह उजोरोड नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस कर रहा है। रूस के हमले से हालात बिगड़ने पर वह भी यूक्रेन में फंस गया था। सुभान के मुताबिक वह और उसके साथी तीन दिन से छात्र सो नहीं सके थे। हॉस्टल से हंगरी बॉर्डर की दूरी 30 किलोमीटर थी। शनिवार की शाम वह कुछ साथियों के साथ किसी तरह हंगरी बॉर्डर पहुंचा। भारत सरकार के विमान से उसे दिल्ली तक आने का मौका मिल गया। 

सुभान ने बताया कि हवाई जहाज में सवार होने के बाद राहत मिली तो रविवार को दिल्ली हवाई अड्डे पर उतरने के बाद तसल्लीबख्श सांस ली। इसके बाद रामपुर तक का सफर दूर नहीं लगा। सुभान ने कहा कि भारत सरकार को फ्लाइट का सिलसिला जारी रखना होगा। अभी बड़ी संख्या में भारतीय छात्र वहां फंसे हुए हैं।
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