पहले भी हो चुका है विवाद
पूर्व अध्यक्ष राकेश पांडेय का कहना है कि वर्तमान न्यायविद मंदिर को बचाने के लिए अधिवक्ताओं ने बहुत संघर्ष किया है। इसका आकार छोटा कर व्यवस्था बनाई जा सकती है और विकास कार्य हो सकता है, लेकिन इस तरह से किया जाने वाला कार्य साजिश को दर्शाता है।
न्यायविद हनुमान मंदिर बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष लक्ष्मीकांत मिश्रा का कहना है कि किसी भी दशा में इस साजिश को कामयाब नहीं होने दिया जाएगा। अधिवक्ता वीसी श्रीवास्तव ने बताया कि उन्होंने अध्यक्ष से इस मुद्दे पर बातचीत की और उनसे स्थिति जाननी चाही, लेकिन स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन यह मंदिर नहीं बनवा सकता है। शिलान्यास वाली जगह के पीछे शौचालय है। उन्होंने कहा कि यह एक साजिश का हिस्सा है। ऐसा तब हो रहा है, जब न्यायविद हनुमान मंदिर को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका लंबित है।