पहाड़ों व अन्य इलाकों में पिछले कई दिनों से हो रही बारिश की वजह से गंगा-यमुना के प्रवाह में तेजी आ गई है। सहायक नदियों और नालों से होकर गंगा-यमुना में लगातार पानी आ रही है। तीन दिन के भीतर आधा मीटर पानी बढ़ने से बाढ़ नियंत्रण के लिए गोताखोर और एनडीआरएफ की तैनाती कर दी गई है, लेकिन अभी खतरा दूर है। कहा जा रहा है कि इसी तरह प्रवाह बढ़ता रहा तो इस बार समय से पहले बाढ़ का सामना करना पड़ सकता है।
सिंचाई विभाग के बाढ़ नियंत्रण खंड के कंट्रोल रूम के अनुसार मंगलवार की शाम फाफामऊ में गंगा का जलस्तर 77.84 मीटर रिकार्ड किया गया। इसी तरह छतनाग में गंगा का जलस्तर तीन दिन के भीतर 72.95 मीटर से बढ़कर 73.45 मीटर पहुंच गया। जलस्तर बढ़ने से संगम नोज के अलावा रामघाट, दशाश्वमेध घाट, काली घाट, महावीर घाट पर पर तीर्थपुरोहितों व व्यवसायियों की चिंता बढ़ने लगी है।
पूजा-प्रसाद की दुकानें धीरे -धीरे हटाई जा रही हैं। तीर्थपुरोहित राजमणि तिवारी, सोहनलाल जोशी ने बताया कि बढ़ते जल स्तर को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है। अगर इसी तरह जलस्तर बढ़ता रहा तो जल्द ही चौकियों को सुरक्षित स्थानों पर लेकर जाना पड़ेगा। हालांकि जिंदगियां धीरे-धीरे खिसकने लगी हैं।
गंगा में समाया सेतु निगम का जलयान
गंगा-यमुना में तेज प्रवाह की वजह से नैनी में उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम का लाखों रुपये की लागत वाला जलयान यमुना में समा गया। चुनार से फतेहपुर जाते समय जलयान बीते हफ्ते अरैल में फंस गया था। इस जलयान को निकालने की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी को दी गई थी। पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने बताया कि जलयान नहीं निकाला जा सका है। फिलहाल दो-दो टन के भारी पत्थरों के सहारे उसे मोटे लोहे के तार से बांध दिया गया है, ताकि बाढ़ के बाद निकाला जा सके।