सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी डॉ. सियाराम वर्मा ने बताया कि विभाग ने नई गाड़ियों के नंबरों केे आवंटन में तीन नए प्रमुख बदलाव किए गए हैं। नई गाड़ियों के नंबर अब डीलर्स द्वारा फीस और टैक्स ऑनलाइन जमा किए जाने पर तुरंत ही ऑटोमेटिक जनरेट होंगे। लोगों को आरटीओ कार्यालय जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। नई व्यवस्था होने से आवंटित होने वाले नंबरों में कोई भी उलटफेर भी नहीं हो सकेगा। लोगों को मनमर्जी से नहीं बल्कि ऑनलाइन व्यवस्था के जरिए क्रमबद्ध तरीके से ही नंबर एलाट होगा।
इसके अलावा जो लोग पहले वीआईपी नंबर की बुकिंग कराते थे अब उन्हें ये नंबर पहले आओ पहले पाओ की तर्ज पर दिए जाएंगे। बोली लगाने वाली व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है। अभी तक सरकार ने वीआईपी नंबरों के लिए बोली लगाने की व्यवस्था कर रखी थी लेकिन वीआईपी नंबरों की बिक्री की कमी के चलते यह व्यवस्था बदल दी गई है।
डॉ. वर्मा के मुताबिक नई व्यवस्था के तहत प्रदेश के किसी भी जिले में नई गाड़ी खरीदने पर उसका रजिस्ट्रेशन नंबर वाहन खरीदने वाले के गृह जनपद का दिया जाएगा। इसके लिए वाहन स्वामी को डीलर्स से यह बोलना पड़ेगा कि उसे उसके गृह जनपद का नंबर एलाट किया जाए। उदाहरण के लिए अगर प्रयागराज का निवासी लखनऊ में नई गाड़ी खरीदता है तो वहां के डीलर्स से बोलकर वह प्रयागराज का नंबर यूपी 70 ले सकेगा।
अभी तक प्रदेश में दूसरे जिले में नई गाड़ी खरीदने पर वाहन स्वामी को पहले अस्थायी रजिस्ट्रेशन कराना पड़ रहा था। बाद में स्थायी रजिस्ट्रेशन कराने के लिए अपने गृह जनपद के आरटीओ कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ता था। लेकिन, परिवहन विभाग ने नई व्यवस्था में इसको समाप्त कर दिया है। हालांकि, दूसरे प्रदेश में नया वाहन ले जाने पर अस्थायी रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। यह अस्थायी रजिस्ट्रे्शन एक महीने की बजाय छह महीने तक लिए होगा। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी डॉ. वर्मा ने बताया कि नई व्यवस्था को लागू कर दिया गया है।