अरुण फौजी सेना में 1994 में सेना में भरती हुआ। इसके बाद वर्ष 2000 में उसने मानेसर में एनएसजी कमांडो का प्रशिक्षण लिया और ग्रेडनर (हैंड ग्रेनेड फेंकने वाला) की ट्रेनिंग ली। कुछ समय के लिए वह यूपी में राज्यपाल की सुरक्षा फ्लीट में भी तैनात रहा। खैर में बहनोई की पारिवारिक व रिश्तेदारी की रंजिश से उसने जरायम दुनिया में कदम रखा। सेना से अवकाश पर आने के दौरान करीब 21-22 साल पहले बुलंदशहर में बैंक की कैश वैन लूटने में सिविल लाइंस इलाके से गिरफ्तार हुआ। इसके बाद उसने सेना से सेवानिवृत्ति ले ली और फिर अपराध की दुनिया में कूद गया।
इस दौरान उसने राजस्थान, पश्चिमी यूपी, एनसीआर, मैनपुरी, हरियाणा में कई बड़े अपराध किए। इनमें सोनू गौतम के साथ श्रीधाम एक्सप्रेस हत्याकांड, एनसीआर से आईओसी इंजीनियर का अपहरण, अकराबाद में पूर्व विधायक के भतीजे को कार सहित हाईजैक कर लूटपाट करने, मैनपुरी में लूट सहित कई बैंक डकैतियां, अपहरण, हत्याओं आदि के 31 से ज्यादा अपराध एक दशक पहले तक उसके नाम पर दर्ज थे।
आईओसी इंजीनियर के अपहरण के मामले में उसे एसटीएफ ने मथुरा में गुड्डा संग गिरफ्तार हुआ। पंकज उर्फ भोला ने उसे मथुरा में पुलिस अभिरक्षा से छुड़ाया, इसके बाद में फरीदाबाद में पकड़ा गया। बाद में साथी नगनू की हत्या के बाद वह पंकज और सोनू गौतम से अलग हुआ। बाद में उसके साथी इनामी पंकज को पुलिस ने 2014 में बन्नादेवी क्षेत्र में मुठभेड़ में मार गिराया था। उसके एक भाई अनिल को खैर के एक हत्याकांड में सजा हो चुकी है।अरुण फौजी पर भरतपुर में ही जेल से पचास लाख की रंगदारी मांगने का मामला भी पिछले दिनों दर्ज हुआ। इससे पहले जेल से छूटने के दौरान खैर में भी उस पर रंगदारी मांगने का आरोप लगा था।