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अतीत का अलीगढ 4: 1853 में अलीगढ़ में थी हिंदुओं की संख्या मुसलमानों से नौ गुनी, 1847 में हुई पहली जनगणना

Thu, 26 Oct 2023 03:22 AM IST
चमन शर्मा कुमार अतुल, अमर उजाला, अलीगढ़

सार

राज्य सरकार ने एक शासनादेश के जरिए प्रदेश के सभी जिलों के लिए नया जिला गजेटियर तैयार करने का आदेश दिया है। उसके लिए कमेटियों का गठन किया जा रहा है। अलीगढ़ का अंतिम गजेटियर 1909 में तैयार किया गया था। लगभग 400 पेजों की इस पुस्तक में लगभग 114 साल पुराने अलीगढ़ के भूगोल, नदियों, प्रशासनिक व्यवस्था, सिंचाई व ड्रेनेज सिस्टम, पुलिस व्यवस्था आदि के बारे में विस्तार से वर्णन है। इस संबंध में अतीत का अलीगढ़ नाम से एक समाचार श्रृंखला शुरू की जा रही है। उम्मीद है कि पुराने अलीगढ़ के बारे में जानकारी पाठकों को रुचिकर लगेगी। कृपया अपनी राय से हमें अवगत कराएं।
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अतीत का अलीगढ़ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जिला अलीगढ़ में पहली बार जनगणना का प्रयास 1847 में किया गया था। सभी परगनाओं की आबादी को जोड़कर कुल जनसंख्या 739356 थी। हालांकि जनगणना को अवैज्ञानिक बताया गया था। इसके बाद 1852 में जनगणना कराई गई जिसके नतीजे 1853 में सार्वजनिक किए गए। इसके मुताबिक जिले की कुल जनसंख्या 1026690 थी। इनमें 480786 महिलाएं थीं। हिंदुओं की संख्या 916707 और मुसलिमों की तादात 109983 थी। अर्थात उस वक्त तक हिंदुओं की संख्या मुसलमानों की अपेक्षा लगभग नौ गुनी थी। जनसंख्या का औसत घनत्व 527 व्यक्ति प्रति मील था। कोल तहसील में यह घनत्व सबसे ज्यादा 744 व्यक्ति, हाथरस में 709 , चंडौस और गंगीरी में 390, टप्पल में 370 और बरौली में 360 व्यक्ति प्रति मील था।

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1865 में पहली बार जाति और व्यवसाय को शामिल किया गया था जनगणना में
इसके पश्चात जनगणना का कार्य 1865 में किया गया। इस जनगणना में पहली बार जाति और व्यवसाय को शामिल किया गया था। हैरानी वाली बात यह थी कि इस जनगणना में अलीगढ़ जिले की आबादी में कमी दर्ज की गई थी। अंग्रेजों की ओर से तैयार कराए गए दस्तावेजों में जनसंख्या में कमी का कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया था। लेकिन समझा जाता है कि इसकी प्रमुख वजह 1857 की क्रांति थी। जिसमें बड़ी संख्या में लोग या तो मारे गए थे अथवा जिले से इधर-उधर गए थे। कुल जनसंख्या 926754 दर्ज की गई थी।  इनमें महिलाओं की संख्या 426008 थी। हिंदुओं की संख्या 823228 और मुसलमानों की संख्या 103360 थी। 1872 में कराई गई जनगणना में जनसंख्या में दोबारा वृद्धि दर्ज की गई। अलीगढ़ जिले की कुल जनसंख्या 1073256 दर्ज की गई थी। इनमें 495928 महिलाएं थीं। 955044 हिंदू थे जबकि 117911 मुसलमान थे।

अकाल और बीमारियों ने 1881 में फिर घटा दी जनसंख्या
1881 की जनगणना में मामूली तौर पर जनसंख्या में कमी दर्ज की गई। जिले की कुल जनसंख्या 1021187 थी। इनमें 469903 महिलाएं थीं। जनसंख्या में कमी की मुख्य वजह अकाल और बीमारियों का असर बताई गई थी। पड़ोसी जिलों मथुरा, आगरा और एटा में भी अकाल और बीमारियों का व्यापक असर देखा गया था। इस जनगणना में हिंदुओं की संख्या 901144 और मुसलमानों की संख्या 1021187 थी।

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हालात सुधरे तो 1891 में जनसंख्या भी बढ़ी

अकाल और बीमारियों से इस दशक में काफी हदतक निजात मिल गई थी। इसका असर जनसंख्या में भी देखने को मिला था। 1891 में कुल जनसंख्या 1043172 दर्ज की गई थी। इनमें महिलाओं की संख्या 484429 थी। हिंदुओं की संख्या 918730 और मुसलमानों की संख्या 120338 थी। 4104 अन्य धर्मों के लोग थे जिनमें बहुतायत में सिख और ईसाई थे। इस दशक में जनसंख्या में बढ़ोतरी के बावजूद खैर, इगलास और कोल तहसीलों में जनसंख्या में कमी दर्ज की गई।

1896-97 के अकाल के बावजूद 1901 की जनगणना में बढ़ी आबादी
1896-97 में बड़ा अकाल पड़ा था। इसके बाद भी जिले की जनसंख्या में वृद्धि दर्ज की गई थी। पड़ोसी जिलों मेरठ, बुलंदशहर, एटा और आगरा में भी जनसंख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। 1901 में जिले की कुल जनसंख्या 1200822 दर्ज की गई। सबसे ज्यादा वृद्धि अतरौली और सिकंदराराऊ में देखी गई। जिले में औसत जनसंख्या घनत्व 617 व्यक्ति प्रति मील था। हाथरस और अलीगढ़ में यह घनत्व 776 जबकि अतरौली में 577 और इगलास में 557 व्यक्ति प्रति मील था। सबसे कम जनसंख्या घनत्व खैर में 439 व्यक्ति प्रति मील दर्ज किया गया था। 
जारी...
स्रोतः अलीगढ़ गजेटियर 1909
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