आजादी के बाद जब देश के तेज विकास के लिए बिजली की महती आवश्यकता थी। ऐसे में भारत के सबसे नजदीकी दोस्त रूस ने पूरा साथ निभाया। इसी दोस्ती की मिसाल हरदुआगंज तापीय परियोजना कासिमपुर है। जिसकी पहली यूनिट को रूस की तकनीकी से बनाया गया था। इस तकनीकी से यहां दो तीन यूनिटें बनीं और देश के द्वितीय प्रधानमंत्री स्व. लाल बहादुर शास्त्री से लेकर पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी तक यही सिलसिला चलता रहा। इसके बाद थर्मल पॉवर की आधुनिक तकनीकी से यहां नई यूनिटें बनती रहीं। वर्तमान में यहां नई 660 मेगावाट यूनिट बन कर तैयार हो चुकी है, जिसको जापानी कंपनी तोशीबा ने बनाया है। नवंबर में इससे उत्पादन करने की तैयारी है।
नई यूनिट चलने के बाद इस पॉवर हाउस की कुल बिजली उत्पादन क्षमता रोजाना 1280 मेगावाट पहुंच जाएगी। ये पॉवर हाउस देश के उन 135 पॉवर हाउसों में शुमार है, जहां थर्मल एनर्जी तकनीक से बिजली का उत्पादन होता है। इस प्रक्रिया में कोयले को जला कर भाप बनाई जाती है। इस भाप की शक्ति से टरबाइन घूमती है और जेनरेटर बिजली बनाते हैं। नई बनी यूनिट को सुपर क्रिटिकल यूनिट कहा जाता है। जिससे आधुनिक मशीनों से उक्त तकनीक का प्रयोग कर बिजली उत्पादन होगा।
वर्तमान में जारी कोयला संकट ने यहां के उत्पादन को प्रभावित किया तो कुछ दिनों के लिए उत्पादन लड़खड़ा गया था, लेकिन अब दो यूनिटों में 500 मेगावाट का उत्पादन हो रहा है, जिससे स्थिति संतोषजनक है, लेकिन भविष्य में इस पॉवर हाउस को पूरी क्षमता से उत्पादन करने के लिए लगभग 4 मालगाड़ी कोयला प्रतिदिन चाहिए होगा। वर्तमान में 620 मेगावाट उत्पादन के लिए लगभग ढाई मालगाड़ी कोयले की जरूरत होती है। जब 1280 यानी दोगुना उत्पादन होगा तो लगभग चार से पांच मालगाड़ी कोयला प्रतिदिन चाहिए होगा।
ऐसे आगे बढ़ा पावर हाउस
1968-69 में यूनिट नंबर एक और दो, उत्पादन क्षमता 50-50 मेगावाट
1971-72 में यूनिट नंबर तीन और चार, उत्पादन क्षमता 55-55 मेगावाट
1977-78 में यूनिट नंबर पांच और छह, उत्पादन क्षमता 60-60 मेगावाट
1978-79 में यूनिट नंबर सात बनीं, जिसकी उत्पादन क्षमता 120 मेगावाट
2014-15 में यूनिट नंबर 8 और 9 बनी, उत्पादन क्षमता 250-250 मेगावाट
2021 में 660 मेगावाट की नई यूनिट तैयार हुई, नवंबर से उत्पादन होगा
पॉवर हाउस में बिजली उत्पादन को उच्चतम स्तर तक ले जाना ही लक्ष्य है। नई यूनिट के शुरू होने के साथ इस प्रोजेक्ट के उत्पादन में चार चांद लग जाएंगे।
-सुनील कुमार सिंह, महाप्रबंधक हरदुआगंज तापीय परियोजना कासिमपुर