धनु संक्रांति का महापुण्यकाल 15 दिसंबर को दोपहर 3 बजकर 43 मिनट से लेकर शाम 5 बजकर 26 मिनट तक रहेगा।
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Dhanu Sankranti 2024: वैदिक ज्योतिष शास्त्र में सूर्य के गोचर को संक्रांति के नाम से भी जाना जाता है। धनु संक्रांति हिंदू धर्म में विशेष महत्व होता है। सूर्य हर माह जिस राशि में परिवर्तन करते हैं उस राशि के नाम से संक्रांति बनती है। वैदिक पंचांग के अनुसार सूर्य 15 दिसंबर 2024 को धनु राशि में प्रवेश करेंगे, इस तरह से इसे धनु संक्रांति के नाम से जाना जाएगा। धनु संक्रांति से खरमास आरंभ हो जाता है। खरमास के दौरान विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, नामकरण जैसे संस्कार और मांगलिक कार्य बंद हो जाते हैं। धनु संक्रांति पर पूजा-पाठ, पवित्र नदियों में स्न्नान, दान और सूर्यदेव की पूजा-उपासना बहुत ही शुभ माना जाता है। दरअसल सूर्य हर माह अपनी राशि बदलते और 15 दिसंबर को सूर्यदेव वृश्चिक राशि की अपनी यात्रा को विराम देते हुए देवगुरु बृहस्पति की राशि धनु में प्रवेश करेंगे। आइए जानते हैं धनु संक्रांति का महत्व और उपाय।
धनु संक्रांति का पुण्यकाल
15 दिसंबर 2024 को धनु संक्रांति है। इस संक्रांति का पुण्यकाल 15 दिसंबर को दोपहर 12 बजकर 16 मिनट लेकर शाम 5 बजकर 26 मिनट तक रहेगा। वहीं धनु संक्रांति का महापुण्यकाल 15 दिसंबर को दोपहर 3 बजकर 43 मिनट से लेकर शाम 5 बजकर 26 मिनट तक रहेगा।
धनु संक्रांति का महत्व
वैसे तो सभी 12 संक्रांति का महत्व होता है लेकिन धनु संक्रांति का विशेष महत्व होता है। धनु संक्रांति पर सूर्य उपासना और दान करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है। धनु संक्रांति पर पवित्र नदियों में स्नान करने से जीवन में आने वाली सभी बाधाएं दूर होती है। सूर्य उपासना से आयु,आरोग्य,धन,विद्या, वैभव और सौभाग्य आदि की प्राप्त होती है।
धनु संक्रांति के उपाय
धनु संक्रांति पर सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र धारण भगवान भास्कर को जल अर्पित करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार धनु संक्रांति पर सूर्य देव को जल अर्पित करने पर भगवान सूर्य की विशेष कृपा मिलती है। वैदिक ग्रंथों में सूर्य देव को रोगों को नष्ट करने वाला और जीवन शक्ति प्रदान करने वाला माना गया है। सूर्य की उपासना का उल्लेख ग्रंथों में बार-बार किया गया है। सूर्य उपासना से स्वास्थ्य, समृद्धि और ज्ञान की प्राप्ति होती है। सूर्य को जल देने से पूर्व जन्म और इस जन्म के सभी पापों से मुक्ति और भगवान सूर्य नारायण की कृपा प्राप्त होती है। धनु संक्रांति पर महामृत्युंजय के मंत्रों का जाप करने से हर एक परेशानियों का अंत होता है और सफलता के द्वार खुलते हैं। धनु संक्रांति पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करना शुभफलदायी माना जाता है। धनु संक्रांति पर अन्न, धन और कपड़ों का दान करने से शुभ फल की प्राप्त होती है।
धनु संक्रांति पर ऐसे करें पूजा
सुबह स्नान के बाद भगवान सूर्य को जल अर्पित करें। इसके लिए तांबे के लोटे में जल भरें, इसमें चावल, लाल फूल एवं गुड़ डालकर सूर्य को अर्घ्य अर्पित करें। जल अर्पित करने के बाद सूर्य मंत्र का जाप करें। सूर्य मंत्र - ऊँ सूर्याय नम:, ऊँ भास्कराय नम:, ऊँ आदित्याय नमः, ऊँ दिनकराय नमः, ऊँ दिवाकराय नमः, ऊँ खखोल्काय स्वाहा इन मंत्रों का जाप करना चाहिए।