सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करना ''संक्रांति '' कहलाता है और सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने को मकर संक्रांति कहते हैं। सूर्य के सभी संक्रमणों में से यह संक्रमण जब सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं, सबसे अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।
Makar Sankranti 2024: सूर्य का मकर रेखा से उत्तरी कर्क रेखा की ओर जाना 'उत्तरायण ' तथा कर्क रेखा से दक्षिणी मकर रेखा की ओर जाना 'दक्षिणायण ' है।
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Makar Sankranti: भारत ऐसा देश है जहां हर त्योहार को मनाने के पीछे कोई न कोई वैज्ञानिक या आध्यात्मिक कारण रहता है। किसी ना किसी रूप में मकर संक्रांति का पर्व भी पूरे देश में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। मकर संक्रांति का त्योहार संक्रमणकालीन चरण माना जाता है। जिस समय पृथ्वी सूर्य के चारों ओर एक चक्कर लगाती है उस अवधि को सौर वर्ष कहते हैं। पृथ्वी का गोलाई में सूर्य के चारों ओर घूमना क्रांतिचक्र कहलाता है। इस परिधि चक्र को बांटकर बारह राशियां बनी हैं। बारह महीने बारह राशियों के लिए हैं। मकर का अर्थ है मकर राशि और संक्रांति का अर्थ है संक्रमण।
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सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करना ''संक्रांति '' कहलाता है और सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने को मकर संक्रांति कहते हैं। सूर्य के सभी संक्रमणों में से यह संक्रमण जब सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं, सबसे अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। सूर्य का मकर रेखा से उत्तरी कर्क रेखा की ओर जाना 'उत्तरायण ' तथा कर्क रेखा से दक्षिणी मकर रेखा की ओर जाना 'दक्षिणायण ' है। उत्तरायण में दिन बड़े हो जाते हैं तथा रातें छोटी होने लगती हैं। दक्षिणायण में ठीक इसके विपरीत होता है।
शास्त्रों के अनुसार उत्तरायण देवताओं का दिन और दक्षिणायण देवताओं की रात होती है। वैदिक काल में उत्तरायण को देवयान और दक्षिणायण को पितृयान कहा जाता था। मकर संक्रांति के दिन यज्ञ में दिए द्रव्य को ग्रहण करने के लिए देवता धरती पर अवतरित होते हैं। इसी मार्ग से पुण्यात्माएं शरीर छोड़कर स्वर्ग आदि लोकों में प्रवेश करती हैं। इसलिए यह आलोक का अवसर भी माना जाता है।
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श्रीकृष्ण ने बताया उत्तरायण का महत्व
भगवान श्रीकृष्ण ने भी उत्तरायण का महत्त्व बताते हुए गीता के आठवें अध्याय में कहा है कि उत्तरायण के 6 मास के शुभ काल में जब भगवान भास्कर देव उत्तरायण होते हैं तो पृथ्वी प्रकाशमय रहती है , तो इस प्रकाश में शरीर का परित्याग करने से व्यक्ति का पुनर्जन्म नहीं होता ऐसे लोग ब्रह्म को प्राप्त होते हैं। इसके विपरीत सूर्य के दक्षिणायण होने पर पृथ्वी अंधकारमय होती है और इस अन्धकार में शरीर का त्याग करने पर पुनः जन्म लेना पड़ता है।
मकर संक्रांति पर स्नान का महत्त्व
श्रीतुलसीदास जी ने रामचरितमानस में लिखा है कि '' माघ मास में जब सूर्य मकर राशि में आते हैं तब सब लोग तीर्थों के राजा प्रयाग के पावन संगम तट पर आते हैं देवता, दैत्य, किन्नर और मनुष्यों के समूह सब आदरपूर्वक त्रिवेणी में स्नान करते हैं ''। वैसे तो प्राणी इस माह में किसी भी तीर्थ , नदी और समुद्र में स्नान कर दान -पुण्य करके कष्टों से मुक्ति पा सकता है लेकिन प्रयाग संगम में स्नान का फल मोक्ष देने वाला है।