6 ग्रहों का शुभ संयोग
ज्योतिष गणना के अनुसार इस बार गणेश चतुर्थी तिथि पर एक साथ 6 ग्रहों का शुभ संयोग बन रहा है। जिसके कारण यह गणेशोत्सव बहुत ही मंगलकारी और शुभफल देने वाल होगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 10 सितंबर को एक साथ 6 ग्रह अपनी सबसे शुभ पोजिशन में रहेंगे। वाणी और बुद्धि के देवता ग्रह बुध कन्या राशि में, सुख और वैभव प्रदान करने वाले शुक्र तुला राशि में, न्याय कारक ग्रह शनिदेव मकर राशि में, चंद्रमा तुला राशि में, मंगल कन्या राशि में और सूर्य सिंह राशि में मौजूद रहेंगे। गणेश चतुर्थी के दिन इन 6 ग्रहों के योग से बिजनेस और छात्रों को लाभ मिलने के संकेत हैं।
शुभ योग
इस बार गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की स्थापना रवियोग में की जाएगी। ज्योतिष में रवियोग को बहुत ही शुभ योग माना गया है। इस के अलावा रवि योग के साथ चित्रा-स्वाति नक्षत्र का भी शुभ योग बन रहा है। पंचांग गणना के अनुसार चित्रा नक्षत्र शाम 5 बजे तक रहेगा फिर उसके बाद स्वाति नक्षत्र लग जाएगा। ऐसे में इस दिन गणपति भगवान की स्थापना करना शुभ और मंगलकारी रहेगा।
गणेश चतुर्थी शुभ मुहूर्त Ganesh Chaturthi 2021 Shubh Muhurat
दोपहर 11 बजकर 02 मिनट से लेकर 01 बजकर 32 मिनट तक
अवधि: 2 घंटे 29 मिनट
गणेश चतुर्थी व्रत व पूजन विधि
1. व्रती को चाहिए कि प्रातः स्नान करने के बाद सोने, तांबे, मिट्टी की गणेश प्रतिमा लें।
2. चौकी में लाल आसन के ऊपर गणेश जी को विराजमान करें।
3. गणेश जी को सिंदूर व दूर्वा अर्पित करके 21 लडडुओं का भोग लगाएं। इनमें से 5 लड्डू गणेश जी को अर्पित करके शेष लड्डू गरीबों या ब्राह्मणों को बांट दें।
4. सांयकाल के समय गणेश जी का पूजन करना चाहिए। गणेश चतुर्थी की कथा, गणेश चालीसा व आरती पढ़ने के बाद अपनी दृष्टि को नीचे रखते हुए चन्द्रमा को अर्घ्य देना चाहिए।
5. इस दिन गणेश जी के सिद्धिविनायक रूप की पूजा व व्रत किया जाता है।
6. ध्यान रहे कि तुलसी के पत्ते (तुलसी पत्र) गणेश पूजा में इस्तेमाल नहीं हों। तुलसी को छोड़कर बाकी सब पत्र-पुष्प गणेश जी को प्रिय हैं।
7. गणेश पूजन में गणेश जी की एक परिक्रमा करने का विधान है। मतान्तर से गणेश जी की तीन परिक्रमा भी की जाती है।