2016 के विधानसभा चुनाव से पहले पूर्व सरकार ने एससी और बीपीएल उपभोक्ताओं की 137 करोड़ की पेमेंट माफ की थी, उसका भी भुगतान अब तक पावरकॉम को नहीं हुआ है। इन सभी सब्सिडियों का भुगतान न होने कारण पावरकॉम के सभी विकास कार्य और प्रदेश में नए पावर प्लांट लगाने का काम प्रभावित हो रहा है। यहां तक कि बिजली लाइनों व सिस्टम की मरम्मत के लिए जरूरी साजो-सामान जैसे केबल, ट्रांसफार्मर और खंभों तक की खरीद पावरकॉम पर्याप्त गिनती में नहीं कर पा रहा है। स्टोरों में सामान की किल्लत है, जिसका सीधा असर शिकायतों का निपटारा न होने से बिजली सप्लाई पर पड़ता है।
इस तरह से 9547 करोड़ की पेंडिंग सब्सिडी और 2000 करोड़ के सरकारी विभागों के बकाया बिजली बिलों के कारण पावरकॉम इस समय 11547 करोड़ के नुकसान में आ गया है। इसके चलते पावरकॉम पिछले कुछ महीनों से अपने तकरीबन 500 रिटायरियों की बनती पेमेंट का भी भुगतान नहीं कर पा रहा है। यह राशि करीब 125 करोड़ रुपये बनती है।
रेगुलेटरी कमीशन की अनुमति बिना दी सब्सिडी एक्ट का उल्लंघन : एसोसिएशन
पीएसईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन के महासचिव इंजीनियर अजय पाल सिंह अटवाल ने कहा कि आर्थिक दिक्कतों का सीधा असर उपभोक्ताओं को क्वालिटी बिजली सप्लाई देने पर पड़ेगा। पावरकॉम के सीएमडी को पत्र लिखकर मांग की है कि पंजाब स्टेट इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन की अनुमति के बिना पंजाब सरकार ने इस तरह से उपभोक्ताओं को राहत देकर बिजली एक्ट-2003 का उल्लंघन किया है। अब पावरकॉम मैनेजमेंट या तो इस उल्लंघन का रोके या फिर सरकार से सब्सिडी राशि हासिल करे।