मृतक साक्षी के परिवार वालों का कहना है कि दिवाली वाले दिन सुबह करीब नौ बजे दस्त लगने पर उसे निजी अस्पताल लेकर गए। वहां प्राथमिक जांच के बाद बच्ची को चंडीगढ़ स्थित सेक्टर 16 अस्पताल लेकर जाते वक्त रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। मृतका चाहत के परिवार वालों ने तबीयत बिगड़ने पर सरकारी अस्पताल में दाखिल करवाया। जहां इलाज के दौरान थोड़ी देर बाद उसने दम तोड़ दिया। मामले की खबर मिलने पर एडीसी, एसडीएम प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग की टीम ने निरीक्षण किया।
बस्ती में विभाग की लाइन नहीं: एसडीओ
वाटर व सीवरेज बोर्ड के एसडीओ तरनजीत सिंह ने बताया कि ढेहा बस्ती में विभाग की लाइन नहीं है। पता नहीं लोगों ने कहां से कनेक्शन ले रखे हैं। नगर परिषद ने सीवरेज लाइन का प्रस्ताव जरूर भेजा था। हम वहां पर लाइन डाल सकते हैं जो नगर काउंसिल का एरिया हो। उनके ध्यान में अभी आया है कि वहां पर गैरकानूनी कनेक्शन चल रहे हैं। अब प्रशासन जैसा आदेश देगा वैसे ही किया जाएगा।
ओआरएस घोल के अलावा क्लोरीन की गोलियां वितरित कर रहे हैं
ढेहा बस्ती में मौजूद स्वास्थ्य विभाग की टीम में तैनात डॉक्टर तरुण गोयल ने बताया कि दस्त लगने से पानी की कमी के कारण बच्चों की मौत हुई है। ओआरएस घोल के अलावा क्लोरीन की गोलियां वितरित की जा रहीं हैं।
एसडीएम डॉ. संजीव कुमार ने बताया कि पानी के अलावा बच्चों के स्टूल के सैंपल लेकर राजिंद्रा अस्पताल में भेज दिए गए हैं, ताकि बच्चों की मौत के असली कारणों का पता चल सके। इसके साथ ही वाटर व सीवरेज बोर्ड के एसडीओ को आदेश दिया गया है कि कनेक्शन अलग कर दिए जाएं ताकि किसी तरह के गंदे पानी की सप्लाई न हो सके।
शहर को सिंगापुर बनाने का दावा करने वाले स्वच्छ पानी देने में फेल: चरनजीत बराड़
ढेहा बस्ती में चार बच्चों की मौत की खबर मिलने पर राजपुरा हलके से शिरोमणि अकाली दल के प्रत्याशी व पार्टी प्रवक्ता चरनजीत सिंह बराड़ परिवार से दुख साझा करने पहुंचे और सरकार पर जमकर निशाना साधा। बराड़ ने कहा कि सरकार का ध्यान शहर में इंटरलॉकिंग टाइल्स लगाने पर लगा है, जबकि जनता को पानी व सीवरेज की मूलभूत सुविधाएं देने में वह फेल साबित हुई है।
पिछले कुछ समय से शहर में दूषित पानी आने की खबरें आ रही हैं लेकिन प्रशासन ने इस समस्या को दूर करने के लिए कुछ नहीं किया। शहर को सिंगापुर बनाने की बातें करने वाले स्वच्छ पानी तक मुहैया नहीं करवा पा रहे हैं। मामले की उच्चस्तरीय जांच करवाकर चार बच्चों की मौत का कारण बनने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए, जांच न होने की स्थिति में संघर्ष तेज किया जाएगा।