सात वार नौ त्योहार की नगरी काशी में फाल्गुन महीने की अलग ही मस्ती होती है। इकलौता महीना होता है, जिसमें काशीवासी भगवान शिव के साथ होली खेलते हैं। मार्च में महाशिवरात्रि, रंगभरी एकादशी, चिता भस्म की होली के बाद होली का त्योहार मनाया जाएगा।
रंगभरी एकादशी पर बाबा के भाल पहला गुलाल लगाकर काशीवासी होली के हुड़दंग की अनुमति लेंगे। इसके साथ ही फिजाओं में होली के रंग घुल जाएंगे। महाशिवरात्रि पर बाबा विश्वनाथ का विवाहोत्सव मनेगा। रंगभरी के दूसरे दिन बाबा के गण श्मशान में चिता भस्म की होली खेलेंगे।
आठ मार्च को महाशिवरात्रि पर शिव की नगरी की रंगत कुछ और ही होगी। बाबा विश्वनाथ के धाम सहित शहर के शिवमंदिरों में दर्शन पूजन के लिए भक्त आएंगे। इसकी तैयारियों में प्रशासनिक अफसर जुटे हैं। महाशिवरात्रि पर बाबा विश्वनाथ के विवाहोत्सव का साक्षी बनने के लिए काशी ही नहीं देश भर से श्रद्धालुओं का रेला उमड़ता है। इस बार छह लाख से अधिक शिवभक्त बाबा दरबार में हाजिरी लगाएंगे।