एक साल पहले लॉकडाउन में जब सब कुछ बंद था। परिवहन की व्यवस्था भी बंद थी। उस समय शामली शहर में सन्नाटा पसरा था। फैक्टरियां और काम धंधे बंद होने पर दूसरे राज्यों में फंसे प्रवासी श्रमिकों के पास न राशन बचा था और न जेब में पैसे। भूखे मारने लगी तो हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, जम्मू और हिमाचल आदि राज्यों में काम करने वाले हजारों प्रवासी श्रमिक परिवार की महिलाओं और बच्चों के साथ पैदल ही घर के लिए निकल पड़े थे। कई दिन बाद जब हर तरफ श्रमिकों की भीड़ सड़क पर नजर आई तो शासन के निर्देश पर प्रशासन ने बसों से उन्हें घर भेजने की व्यवस्था की थी। देश में एक बार फिर कोरोना की लहर बढ़ रही है। ऐसे में लोगों को कोरोना से बचाव की पूरी सावधानी बरतनी चाहिए, ताकि फिर से ऐसी स्थिति न बनने पाए।