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Shani Trayodashi 2024: कब है शनि त्रयोदशी? नोट करें पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

Sun, 22 Dec 2024 06:05 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Shani Trayodashi 2024 Date: जब प्रदोष शनिवार के दिन पड़ता है तो उसे शनि त्रयोदशी कहा जाता है। यह दिन भगवान शिव, देवी पार्वती और भगवान शनि की पूजा को समर्पित है। माना जाता है कि त्रयोदशी का व्रत करने से कई लाभकारी परिणाम मिलते हैं, जिनमें मानसिक विकारों से मुक्ति, सुख-समृद्धि में वृद्धि और कार्यों में सफलता शामिल है।
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शनि त्रयोदशी - फोटो : amar ujala
Shani Trayodashi Shubh Muhurat 2024: शनि त्रयोदशी का व्रत बहुत ही शुभ माना जाता है। इसे शनि प्रदोष के नाम से भी जाना जाता है। जब प्रदोष शनिवार के दिन पड़ता है तो उसे शनि त्रयोदशी कहा जाता है। यह दिन भगवान शिव, देवी पार्वती और भगवान शनि की पूजा को समर्पित है। माना जाता है कि त्रयोदशी का व्रत करने से कई लाभकारी परिणाम मिलते हैं, जिनमें मानसिक विकारों से मुक्ति, सुख-समृद्धि में वृद्धि और कार्यों में सफलता शामिल है। कहा जाता है कि इस व्रत को करने वाले भक्तों की सभी मनोकामनाएं भगवान शिव पूरी करते हैं। आइए जानते हैं शनि त्रयोदशी का मुहूर्त और पूजा विधि। 
 
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शनि त्रयोदशी - फोटो : Istock
तिथि 
पौष माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि आरंभ:  28 दिसंबर , शनिवार, तड़के 2:28 मिनट पर 
पौष माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि समाप्त: 29 दिसंबर, रविवार, तड़के 3: 32 मिनट पर  
उदय तिथि के अनुसार ऐसे में पंचांग को देखते हुए शनि त्रयोदशी का व्रत इस साल 28 दिसंबर को रखा जाएगा।
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शनि त्रयोदशी - फोटो : freepik
शिव पूजन मंत्र 
ॐ नमः शिवाय।
ऊँ हौं जूं स: ऊँ भुर्भव: स्व: ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
ऊर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ऊँ भुव: भू: स्व: ऊँ स: जूं हौं ऊँ।।

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शनि त्रयोदशी - फोटो : अमर उजाला
शनि देव पूजन मंत्र 
ॐ शं शनैश्चराय नमः।
ॐ निलान्जन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम।
छायामार्तंड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम॥
 
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शनि त्रयोदशी - फोटो : freepik
पूजा विधि 
  • शनि त्रयोदशी के दिन व्रती सूर्योदय से पहले उठें और स्नान करें।
  • मंदिर की साफ सफाई अच्छी तरह से करें।
  • इसके बाद व्रत का संकल्प लें।
  • अब भगवान शिव और देवी पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें।
  • उनके समक्ष दीपक जलाएं, फल, फूल और मिठाई आदि चीजें अर्पित करें।
  • पूजा के समय मुख उत्तर-पूर्व दिशा की ओर रखकर शिव जी को बेलपत्र चढ़ाएं।
  • पूजा प्रदोष काल यानी संध्या काल में ही की जाती है।
  • व्रती इस दिन फलहारी कर सकते हैं।
  • शिव पूजन के बाद व्रत का पारण करें।

 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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