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ये हैं हरियाणा के ऐतिहासिक मंदिर, किसी को औरंगजेब के भाई ने बनाया तो कोई है 5 हजार साल पुराना

Tue, 08 Jan 2019 02:25 PM IST
kapil sharma लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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bhima devi temple
दिल्ली से सटा हुआ हरियाणा न सिर्फ अपने सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है बल्कि इस सूबे का धार्मिक महत्व भी उतना ही है। हरियाणा में प्राचीन काल के कई मंदिर हैं। ये मंदिर धार्मिक और पर्यटन दोनों ही दृष्टियों से बेहद महत्वपूर्ण हैं। भारतीय संस्कृति और विरासत को संभाले ये मंदिर देशभर में प्रसिद्ध हैं। इनमें से एक मंदिर तो आठवीं शताब्दी में बना है। यहां हम आपको इनमें से चार ऐसे मंदिरों के बारे में बता रहे हैं जो बेहद मशहूर हैं और जिनका ऐतिहासिक महत्व भी है। आइये जानते हैं कौन-से हैं ये मंदिर  
 

 

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भीमा देवी मंदिर
हरियाणा में स्थित मंदिरों के बारे में जानने से पहले आइये हरियाणा के बारे में जान लेते हैं. हरियाणा की राजधानी चंडीगढ़ है। चंडीगढ़ एक ऐसा शहर है जो पूरे भारत में अपनी खूबसूरती के लिए जाना जाता है। पंजाब से अलग होकर साल 1996 में हरियाणा बना। हरियाणा और चंडीगढ़ में प्राचीन काल के कई मंदिर हैं। इनमें भीमा देवी मंदिर, अग्रोहा धाम, भद्रकाली मंदिर आदि शामिल है। इसके अलावा सबसे खास वो मंदिर है जिसके नाम पर चंडीगढ़ का नाम पड़ा है। अगली स्लाइड में पढ़िये औरंगजेब के भाई ने मुस्लिम आक्रमणकारियों से बचाव के लिए किस मंदिर के सामने बनवाया था मुगल गार्डन...  

 

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भीमा देवी मंदिर हरियाणा
भीमा देवी मंदिर
हरियाणा का भीमा देवी मंदिर बेहद प्राचीन मंदिर है। इस मंदिर की स्थापना गुर्जर प्रतिहारस के शासन काल में हुई थी। मंदिर के सामने ही पिंजौर गार्डन है जो कि मुगल गार्डन के नाम से भी जाना जाता है। इस गार्डन की स्थापना औरंगजेब के सौतेले भाई ने की थी। कहा जाता है कि इस गार्डन को औरंगजेब के सौतेले भाई ने हिंदू मंदिरों को तोड़ने से बचाने के लिए बनवाया था।  इतिहास बताता है कि 13वीं और 17 वीं शताब्दी में मुस्लिम आक्रमणकारियों ने कई हिंदू मंदिरों को तुड़वा दिया था। अगली स्लाइड में पढ़िये कब हुआ था भीमा देवी मंदिर का निर्माण
 

 

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bheema devi - फोटो : Social Media
भीमा देवी मंदिर की स्थापना 8वीं से लेकर 11वीं शताब्दी के बीच बताई जाती है। वहीं, इस मंदिर के सामने के पिंजौरी गार्डन की स्थापना इस मंदिर से कई सौ साल बाद हुई थी। पिंजौरी गार्डन को औरंगजेब के सौतले भाई ने बनवाया था। इस गार्डन को मुगल गार्डन के नाम से भी पुकारा जाता है। गार्डन की स्थापना 17वीं शताब्दी में हुई थी। अगली स्लाइड में पढ़िये हरियाणा के उस धाम के बारे में जो आठ साल में बनकर तैयार हुई था..
 
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AGROHA DHAM - फोटो : Social Media
अग्रोहा धाम
अग्रोहा धाम का बेहद धार्मिक महत्व है। यह धाम 8 साल में बनकर तैयार हुआ था। साल 1976 में इस धाम का निर्माण कार्य शुरू हुआ था जो कि 1984 में पूरा हुआ। इस धाम के प्रवेश द्वार के बाहर दोनों साइड हाथी की मूर्तियां बनी हुई हैं। इस धाम में कई धार्मिक त्यौहारों को मनाया जाता है। धाम में आने वालों को एक खास तरह की आध्यात्मिक अनुभूति का अहसास होता है।  अगली स्लाइड में पढ़िए कौन-सा है हरियाणा में स्थित एकमात्रव शक्तिपीठ

 

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BHADRAKALI TEMPLE - फोटो : Social Media
भद्रकाली मंदिर
भद्रकाली मंदिर कुरुक्षेत्र जिले में है। इस मंदिर का बेहद धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है। यह मंदिर हरियाणा का एकमात्र सिद्ध शक्तिपीठ है, जहां भद्रकाली शक्ति के रूप में विराजमान है। वैसे तो हरियाणा के कुरुक्षेत्र में मां के 52 शक्तिपीठ है लेकिन उनमें से यह एकमात्र सिद्ध शक्ति पीठ भद्रकाली मंदिर ही है। इसे श्री देवीकूप शक्तिपीठ के नाम से भी जाना जाता है। अगली स्लाइड में पढ़िये इस मंदिर से जुड़ी धार्मिक मान्यता
 
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bhadrakali mandir - फोटो : Social Media
भद्रकाली मंदिर का धार्मिक महत्व सती से जुड़ा हुआ है। सती के आत्मदाह के बाद जब भगवान शिव, सती की देह लेकर ब्रह्मांड में घूमने लगे तो भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से देवी सती के शरीर के 52 हिस्से कर दिए। मां सती के शरीर के हिस्से जहां-जहां गिरे वहां शक्तिपीठ स्थापित हुए। भद्रकाली शक्तिपीठ में देवी सती का दायां पैर गिरा था। देवी के सती के अलावा इस मंदिर की धार्मिक मान्यता भगवान कृष्ण से भी जुड़ी हुई है।
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chandi mandir har - फोटो : Social Media
चंडी मंदिर
चंडी मंदिर हरियाणा का सबसे पुराना मंदिर है। यह मंदिर 5,100 साल से ज्यादा पुराना है। मंदिर चंडीगढ़-कालका-शिमला हाइवे पर स्थित है। मां चंडी को महिषासुर मर्दनी भी कहा जाता है। इसी मंदिर के नाम पर चंडीगढ़ शहर का नाम पड़ा है। इस मंदिर के बारे में प्रसिद्ध है कि यहां आने वाले भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है।
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