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World Pneumonia Day: अस्थमा और निमोनिया दोनों ही फेफड़े की समस्याएं, लक्षण भी एक जैसे, कैसे करें इनमें अंतर?

Sun, 12 Nov 2023 02:05 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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अस्थमा और निमोनिया की समस्या - फोटो : iStock
सांस की समस्याएं संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए जोखिमकारक हो सकती हैं, इसपर गंभीरता से ध्यान दिए जाने की जरूरत है। अस्थमा और निमोनिया जैसी फेफड़ों की दिक्कतें क्वालिटी ऑफ लाइफ को भी प्रभावित करने वाली मानी जाती हैं, जिसको नियंत्रित करना और इससे बचाव के लिए प्रयास किया जाना जरूरी होता है। निमोनिया, छोटे बच्चों और बुजुर्गों में मृत्यु के प्रमुख कारणों में से भी एक है।

वैश्विक स्तर पर बढ़ती इस स्वास्थ्य विकार के बारे में लोगों को शिक्षित और बचाव को लेकर जागरूक करने के उद्देश्य से हर साल 12 नवंबर को वर्ल्ड निमोनिया डे मनाया जाता है।

निमोनिया और अस्थमा दोनों ही फेफड़ों और सांस की समस्याएं हैं और दोनों के लक्षण भी लगभग एक जैसे ही होते हैं, आइए जानते हैं निमोनिया और अस्थमा में कैसे अंतर किया जा सकता है?
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फेफड़ों की समस्या - फोटो : Istock
अस्थमा और निमोनिया की समस्या

अस्थमा और निमोनिया दो ऐसी बीमारियां हैं जो फेफड़ों को प्रभावित करती हैं। अस्थमा एक क्रोनिक स्थिति है, यह समय-समय पर वायुमार्ग में सूजन और संकुचन का कारण बनती है। अस्थमा का इलाज संभव नहीं है, लेकिन आप इसे प्रभावी ढंग से प्रबंधित जरूर कर सकते हैं। 

वहीं निमोनिया फेफड़ों के संक्रमण की बीमारी है। यह एक या दोनों फेफड़ों में हो सकती है। इससे वायुकोषों में सूजन आ जाती है और फेफड़ों में तरल पदार्थ भी भर सकता है। निमोनिया का इलाज और उपचार संभव है। हालांकि इसके कारण छोटे बच्चों-बुजु्र्गों में मृत्यु का खतरा अधिक देखा जाता रहा है।
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श्वसन समस्याओं का जोखिम - फोटो : iStock
अस्थमा और निमोनिया का लिंक

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिन लोगों को अस्थमा की दिक्कत होती है, उनमें निमोनिया होने का खतरा भी अधिक हो सकता है। यदि आपको अस्थमा है और आपको फ्लू हो गया है, तो आपके लक्षण और जटिलताएं बदतर हो सकती हैं। यदि आपको पहले से कोई क्रोनिक स्वास्थ्य समस्या भी है तो अस्थमा को नियंत्रित करना ज्यादा कठिन हो जाता है।  आइए इन दोनों रोगों के लक्षण और इनमें अंतर के बारे में जानते हैं।

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सांस की समस्या को कैसे ठीक करें? - फोटो : istock
अस्थमा और निमोनिया के लक्षणों के बारे में जानिए

अस्थमा अटैक की स्थिति में खांसी, सीने में जकड़न और घरघराहट की दिक्कत देखी जाती है। यदि यह बढ़ता है, तो श्वास और पल्स रेट भी बढ़ने का जोखिम रहता है। फेफड़ों की कार्यक्षमता कम होने से सांस लेना मुश्किल हो सकता है। जब आप सांस लेते हैं तो आपको तेज सीटी की आवाज सुनाई दे सकती है।

वहीं निमोनिया की स्थिति में शुरू में आपको लग सकता है जैसे ये सिर्फ सामान्य सर्दी है। हालांकि जैसे-जैसे संक्रमण बढ़ता है, खांसी के साथ हरा, पीला या खूनी बलगम भी आ सकता है। निमोनिया में सिरदर्द, भूख में कमी, थकान, सीने में दर्द जो सांस लेने या खांसने पर बढ़ जाता है और इसके साथ बुखार भी होता है।
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सांस की समस्याओं से करें बचाव - फोटो : iStock
कैसे करें अस्थमा और निमोनिया में अंतर?

अस्थमा के कारण वायुमार्ग में सूजन और संकुचन हो सकता है। यह ब्रोन्किओल्स को प्रभावित करता है, जो फेफड़ों में वायुमार्ग हैं। हालांकि, निमोनिया एक तरह का संक्रमण है जो एक या दोनों फेफड़ों में होता है और न केवल ब्रोन्किओल्स बल्कि वायुकोषों में भी सूजन का कारण बनता है। अस्थमा के रोगियों को खांसी, घरघराहट और सीने में जकड़न के अलावा, अस्थमा के कारण सांस लेने में कठिनाई हो सकती है। जबकि निमोनिया में खांसी के साथ फेफड़ों में संक्रमण भी हो जाता है जिसके कारण बलगम की समस्या होने लगती है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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