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Lactose Intolerance: इस बीमारी में होती हैं दूध-पनीर खाने से दिक्कतें, जानिए लक्षण और इलाज

Wed, 15 Dec 2021 04:32 PM IST
शिवानी अवस्थी हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
Medically Reviewed by Ms. Priya Pandey

प्रिया पांडेय
डायटिशियन (आहार विशेषज्ञ), उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
डिग्री- बी.एस.सी. (मानव पोषण)
अनुभव- 8 वर्ष


पेट की समस्याओं में से कुछ ऐसी भी हैं जो बहुत गम्भीर रूप नहीं लेतीं और जिनका इलाज भी आसान होता है। इनके साथ भी सामान्य जीवन जिया जा सकता है, बस थोड़े से परिवर्तनों के साथ। लैक्टोज़ इन्टॉलरेंस भी ऐसी ही एक समस्या है। आपने कई लोगों को यह कहते सुना होगा कि उन्हें दूध, पनीर आदि हजम नहीं होता। यहां तक कि कई नवजात शिशुओं को भी जन्म के बाद फॉर्मूला दूध देते समय डॉक्टर इस बात की सुनिश्चित करते हैं कि बच्चा लैक्टोज इन्टॉलरेंट तो नहीं है। इसी हिसाब से फॉर्मूला प्रिस्क्राइब किया जाता है। यह एक ऐसी स्थिति है जिसका पता बहुत ही सामान्य तरीकों से चल सकता है और इसका इलाज भी कठिन नहीं होता। मुश्किल तब होती है जब इस पर नियंत्रण नहीं रह पाता और इसके लक्षण तकलीफ देने लगते हैं। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
लैक्टोज इंटॉलरेंस क्या है?

लैक्टोज इन्टॉलरेंस की समस्या भी असल में शकर से जुड़ी हुई है। लैक्टोज का मतलब ही होता है डेयरी पदार्थों या दूध आदि में मौजूद शकर। लेक्टोज इनटोलरेंस से ग्रसित व्यक्ति इन पदार्थों में मौजूद शकर को पूरी तरह पचा नहीं पाता इसके परिणाम स्वरूप डायरिया यानी कि दस्त, गैस तथा ब्लाटिंग जैसे लक्षण उभरने लगते हैं। इस स्थिति के लिए छोटी आंत में उत्पन्न होने वाले एक एंजाइम (लैक्टेस) की मात्रा जिम्मेदार होती है। यदि यह एंजाइम बहुत कम मात्रा में उत्पन्न होता है तो लेक्टोस इनटोलरेंस की समस्या होती है। कुछ मामलों में यह भी होता है कि एंजाइम की मात्रा थोड़ी कम होने पर इंसान दूध या दूध से बने पदार्थों को बचा लेता है लेकिन यदि एंजाइम बहुत ही कम मात्रा में हो तो पाचन में मुश्किल आती है। आमतौर पर दूध या दूध से बने पदार्थों से सेवन के आधे घण्टे से 2 घण्टे के बाद लक्षण सामने आते हैं। इनमें डायरिया के अलावा उल्टी या नॉशिया, पेट में दर्द या मरोड़ होना, घबराहट होना या गैस बनना शामिल है। चूंकि दूध या डेयरी उत्पाद शारीरिक विकास के लिए भी जरूरी होते हैं साथ ही इनसे पोषण भी मिलता है इसलिए इनका सेवन जरूरी भी है। ऐसे में लैक्टोज इनटॉलेरेंस व्यक्ति के लिए जरूरी हो जाता है कि वह इसके विकल्प ढूंढे। खासकर बच्चों के मामले में क्योंकि उन्हें बचपन से ही यदि सही पोषण न मिले तो आगे जाकर दिक्कत हो सकती है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
समस्या के कई रूप:

लेक्टोज इनटोलरेंस दो तरह का हो सकता है। पहला है प्राइमरी लेक्टोज इनटोलरेंस जिसमें बचपन से धीरे-धीरे वयस्क होने तक एंजाइम का उत्पादन कम होता है। दूसरा है सेकेंडरी लेक्टोज इनटोलरेंस जिसमें किसी बीमारी, चोट या आंत से जुड़ी सर्जरी की वजह से यह समस्या सामने आती है। इन बीमारियों में आंत से जुड़ा कोई संक्रमण, सैलियक डिसीज, बैक्टीरिया संबंधी कोई तकलीफ या फिर क्रोन्स डिजीज आदि शामिल है। दुर्लभ मामलों में कई बार यह समस्या जन्मगत भी हो सकती है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
जांच के बाद अपनाएं सही डाइट:

कुछ सामान्य जांच और शारीरिक परीक्षण के बाद डॉक्टर आपको यह स्पष्ट कर सकते हैं कि आप लेक्टोज इनटोलरेंस से पीड़ित हैं। डॉक्टर आपको डाइट से जुड़ी सावधानियों के बारे में बता सकते हैं। आमतौर पर दूध या दूध से बने पदार्थों के सेवन पर रोक लगाने से आराम मिल जाता है। हालांकि कुछ मामलों में ऐसा भी होता है कि थोड़ी मात्रा में उक्त पदार्थ का सेवन भी दिक्कत नहीं देता। लेकिन अगर तकलीफ ज्यादा है तो इनसे दूरी बनाना बेहतर होता है। आजकल बाजार में लेक्टोज फ्री उत्पाद भी आसानी से मिल जाते हैं जिनका प्रयोग किया जा सकता है। डॉक्टर आपको कुछ सामान्य दवाइयां भी दे सकते हैं जिनसे लक्षणों पर नियंत्रण पाने में मदद मिलती है। लेकिन सबसे ज्यादा जरूरी यह है कि आप अपनी डाइट को इस तरह से प्लान करें कि उससे आपको सभी पोषक पदार्थों की पूर्ति हो सके। क्योंकि दूध या दूध से बने पदार्थ आप नहीं खा सकते ऐसे में आपको कैल्शियम, विटामिन डी, राइबोफ्लेविन और प्रोटीन जैसे पदार्थों की कमी हो सकती है। इसलिए आवश्यक है कि आप डाइट में उन चीजों को शामिल करें जो इन पोषक तत्वों की पूर्ति कर सकें।
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डाइट - फोटो : Pixabay
इन चीजों का करें सेवन:

लेक्टोज इनटोलरेंस होने का मतलब यह नहीं है कि आप पोषक तत्व नहीं पा सकते। डेयरी उत्पादों के अलावा भी अन्य साधनों से अपने लिए पोषक तत्वों की पूर्ति कर सकते हैं। अपनी डाइट में दही को जरूर शामिल करें। दही पेट के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है और यह लेक्टोज इनटोलरेंस लोगों के लिए भी अच्छा होता है। इसके अलावा हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, मैथी व ब्रोकली आदि, ताजे फल जैसे संतरे, सोया मिल्क, बादाम, टोफू व मांसाहारी हैं तो कुछ विशेष प्रकार की मछलियों आदि का प्रयोग कर सकते हैं। इनसे आपको भरपूर मात्रा में कैल्शियम तथा विटामिन और खनिजों सभी की पूर्ति हो जाएगी। विटामिन डी के लिए सबसे अच्छा स्रोत है धूप इसका भी भरपूर सेवन करें।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
ये न खाएं:

लेक्टोज इनटोलरेंस लोगों को केवल दूध व डेयरी प्रोडक्ट से ही तकलीफ नहीं होती। कई ऐसे डिब्बाबंद पदार्थ होते हैं जिनमें डेयरी प्रोटीन या लेक्टोज हो सकते हैं। इसलिए यदि आप किसी डब्बाबंद पदार्थ का प्रयोग करते हैं जैसे कि कोई कॉफी पाउडर, पैनकेक, बिस्किट या केक मिक्स, बेक किए हुए खाद्य, ब्रेड, प्रोसेस्ड सीरियल, सूप या क्रीमी सॉस आदि, तो खरीदने से पहले इंग्रेडिएंट्स को जरूर चेक करें। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
इन बातों का भी रखें ख्याल:

यदि आप अपनी डाइट से सभी पोषक तत्वों की पूर्ति नहीं कर पा रहे हैं तो डॉक्टर से सलाह लेकर सप्लीमेंट भी ले। याद रखिए कि सप्लीमेंट डॉक्टर के कहे अनुसार उसी मात्रा में और उतने ही दिनों के लिए लेना है। अपने मन से कोई भी दवा या सप्लीमेंट न लें। यह भी याद रखें कि केवल दूध या दूध से बने पदार्थ ही आप को नुकसान नहीं पहुंचा सकते। कई बार कुछ विशेष दवाइयां जैसे कि बर्थ कंट्रोल पिल्स या विटामिन की गोलियां भी लेक्टोज इनटॉलरेंस की स्थिति को पैदा कर सकती है। इसलिए आप जो भी दवाइयां ले रहे हो उन्हें लेकर डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

नोट: यह लेख अनुभवी डायटिशियन (आहार विशेषज्ञ) प्रिया पांडेय के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। उन्होंने कानपुर के सी.एस.जे.एम. विश्वविद्यालय से मानव पोषण में बी.एस.सी. किया है। उन्होंने कानपुर के आभा सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में आहार विशेषज्ञ के रूप में काम किया है। उन्होंने जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में पोषण व्याख्यान के विषय के प्रतिनिधि के रूप में भी भाग लिया है। उनका इस क्षेत्र में 8 वर्ष का लंबा अनुभव है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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