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सुरंग में सब्र और इंतजार के 14 दिन: जब-जब उम्मीदें जगीं, तब-तब टूट गईं ख्वाहिशें, बेबसी बयां कर रहीं तस्वीरें

Sat, 25 Nov 2023 09:33 PM IST
अलका त्यागी अमर उजाला ब्यूरो, सिलक्यारा (उत्तरकाशी)
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सिलक्यारा सुरंग के बाहर बैठा परिजन - फोटो : अमर उजाला
उत्तराखंड की सबसे लंबी सुरंग के घुप अंधेरे से जब भी कोई उम्मीद की किरण नजर आई तो वह ज्यादा देर तक खुशी के माहौल को रोशन नहीं रख पाई। 12 नवंबर की सुबह 5:30 बजे से लगातार ऑपरेशन सिलक्यारा को अंजाम तक पहुंचाने की नाकाम कोशिश शनिवार तक जारी है।

41 मजदूरों को मलबे से बाहर निकालने की राह पहले दिन जितनी आसान लग रही थी, 14वें दिन आने तक वहां डगर बेहद मुश्किल हो गई। मलबे को हटाने का पहला प्रयास जेसीबी से मलबा हटाने का हुआ जो उसी समय नाकाम हो गया।

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उत्तरकाशी बचाव अभियान के दौरान इंतजार करते परिजन - फोटो : अमर उजाला
माना गया कि जल्द मजदूर बाहर होंगे, लेकिन जेसीबी चलते ही मलबा आ गया और उसे वहां से हटानी पड़ी। दूसरा प्रयास 45 मीटर तक ड्रिल करने वाली ऑगर मशीन के साथ किया गया, लेकिन सात मीटर बाद ही उसकी क्षमता को कम आंकते हुए हटाना पड़ा।
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उत्तरकाशी बचाव अभियान के दौरान इंतजार करते परिजन - फोटो : अमर उजाला
तीसरा प्रयास 1750 हॉर्स पावर की 25 टन वजनी अमेरिकन ऑगर मशीन मंगाई गई, जिसने 900 मिमी पाइप को मलबे के भीतर पुश करना शुरू किया। 22 मीटर पहुंचने के बाद मशीन क्षतिग्रस्त हो गई, बेयरिंग टूट गए और प्रयास नाकाम हो गया।

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इंतजार में बैठे श्रमिक। - फोटो : amar ujala
इसके बाद तय किया गया कि 900 मिमी पाइप के भीतर से होते हुए 800 मिमी पाइप से ऑपरेशन सिलक्यारा को आगे बढ़ाया जाएगा। ये फार्मूला काम भी आने लगा।
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सिलक्यारा में बैठे परिजन - फोटो : अमर उजाला
22 मीटर से आगे की ड्रिल शुरू हुई और अब तक 47 मीटर तक पहुंच चुकी है, लेकिन यह मशीन करीब 10 बार अटक चुकी है। शुक्रवार की देर रात तो बुरी तरह से टूट गई। ब्लेड फंस गए।
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सिलक्यारा में सुरंग के पास बैठी महिला - फोटो : एजेंसी
इस पूरे अभियान के दौरान कई बार खुशखबरी आई। उम्मीदों के चराग रोशन हुए। लगा कि जैसे मजदूर अगले कुछ पलों में बाहर आ जाएंगे, लेकिन अभी तक निराशा के अलावा कुछ नहीं मिल पाया।
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