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मध्यप्रदेश उपचुनाव: एक लोकसभा और तीन विधानसभा सीट के लिए मतदान संपन्न, पृथ्वीपुर में सबसे अधिक 78 फीसदी वोटिंग

Sat, 30 Oct 2021 06:18 PM IST
रवींद्र भजनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

चुनाव आयोग के मुताबिक दोपहर 5 बजे तक खंडवा में 59%, रैगांव में 67%, पृथ्वीपुर में 76% और जोबट में 51% मतदान हो चुका है। खंडवा में नेपानगर समेत कई जगहों पर मतदान के बहिष्कार की खबरें हैं।
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खंडवा में भाजपा प्रत्याशी ज्ञानेश्वर पाटिल ने पत्नी के साथ जाकर मतदान किया। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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खंडवा लोकसभा सीट के साथ-साथ पृथ्वीपुर, जोबट और रैगांव विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव के लिए शनिवार को मतदान हुआ। चुनाव आयोग के मुताबिक, खंडवा लोकसभा सीट के लिए 68.88 फीसदी वोटिंग हुई। वहीं, तीन विधान सभा सीट के लिए हुए उप-चुनाव के अंतर्गत रैगांव में 69.01 फीसदी, पृथ्वीपुर में 78.14 फीसदी और जोबट में 53.30 फीसदी मतदान हुआ। खंडवा लोकसभा क्षेत्र में लोगों ने चार जगहों पर मतदान का बहिष्कार किया है। खंडवा-बुरहानपुर में कम से कम 10 जगहों पर ईवीएम खराब भी हुई हैं।

मतदान शाम 6 बजे तक चला। चारों सीटों पर करीब 26 लाख 50 हजार मतदाता हैं। यह 48 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला कर रहे हैं। खंडवा संसदीय सीट और रैगांव विधानसभा सीट पर 16-16 प्रत्याशी हैं, जबकि पृथ्वीपुर में 10 और जोबट में 6 प्रत्याशी मैदान में हैं। शनिवार को वोटिंग शुरू होने से 90 मिनट पहले मॉकपोल कराया गया।   

भाजपा का दावा- चारों सीटें जीतेंगे
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इस बीच, भाजपा नेता और उपचुनाव समिति के संयोजक भूपेंद्र सिंह ने एक मीडिया चैनल से बातचीत में चारों सीटों पर भाजपा की जीत का दावा किया। उन्होंने कहा कि महंगाई का चुनाव के नतीजे पर कोई असर नहीं होगा। महंगाई के बारे में सब जानते हैं कि वह सीजनल और अंतरराष्ट्रीय कारणों से होती है।

उधर, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने कहा कि उपचुनावों में वोटिंग प्रतिशत बढ़ेगा और यह भाजपा के पक्ष में जाएगा। अब तक के रुझान में भाजपा को स्पष्ट बढ़त मिलती दिख रही है। वोटिंग के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता गड़बड़ी कर रहे हैं। बीजेपी की लीगल सेल हालात पर निगरानी रखे हुए हैं।   
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भाजपा-कांग्रेस के प्रत्याशी
  • खंडवा लोकसभा सीट पर ज्ञानेश्वर पाटील (भाजपा) बनाम राजनारायण सिंह पूरनी (कांग्रेस)
  • जोबट विधानसभा सीट (अजजा) पर सुलोचना रावत (भाजपा) बनाम महेश पटेल (कांग्रेस)
  • रैगांव विधानसभा सीट (अजा) पर प्रतिमा बागरी (भाजपा) बनाम कल्पना वर्मा (कांग्रेस)
  • पृथ्वीपुर विधानसभा सीट पर शिशुपाल सिंह यादव (भाजपा) बनाम नीतेंद्र सिंह राठौर (कांग्रेस)
इन उपचुनावों की जरूरत क्यों पड़ी?
कोरोना की दूसरी लहर में निर्वाचित प्रतिनिधियों की मौत के बाद सीटें रिक्त हुई हैं। खंडवा लोकसभा सीट पर भाजपा के नंदकुमार सिंह चौहान सांसद थे। कोरोना की वजह से उनका निधन हुआ और इस सीट पर उपचुनाव हो रहे हैं। इसी तरह जोबट विधानसभा से कांग्रेस विधायक कलावती भूरिया, पृथ्वीपुर से ब्रजेंद्र सिंह राठौर और रैगांव से जुगल किशोर बागरी का भी कोरोना से निधन हुआ था। चुनाव कानून के मुताबिक लोकसभा और विधानसभा की सीटें खाली होने के छह महीने के भीतर नया प्रतिनिधि चुना जाना आवश्यक है। इसी के लिए यह उपचुनाव हो रहे हैं।

किसके बीच है मुख्य मुकाबला
48 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। इनमें 32 उम्मीदवार तीन विधानसभा क्षेत्रों में किस्मत आजमा रहे हैं। वहीं, 16 उम्मीदवार खंडवा लोकसभा सीट पर लड़ रहे हैं। चारों ही सीटों पर मुख्य मुकाबला भाजपा-कांग्रेस में है। जोबट और पृथ्वीपुर में भाजपा ने कांग्रेस छोड़कर पार्टी में शामिल होने वालों को उम्मीदवार बनाया है। इन दोनों ही सीटों पर 2018 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने जीत हासिल की थी। दो बार की विधायक सुलोचना रावत को टिकट नहीं मिला तो उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा ज्वाइन कर ली। उनका मुकाबला जोबट में कांग्रेस के जिला प्रमुख महेश पटेल से है। 

पृथ्वीपुर में कुछ ही दिन पहले समाजवादी पार्टी (सपा) छोड़कर भाजपा में आए शिशुपाल यादव को टिकट दिया गया है। उनका मुकाबला ब्रजेंद्र सिंह राठौर के बेटे नितेंद्र सिंह राठौर से है, जो कांग्रेस के टिकट पर भावनात्मक आधार पर जीत दर्ज करने का सपना देख रहे हैं।  

रैगांव में भाजपा के पूर्व विधायक जुगल किशोर बागरी की रिश्तेदार प्रतिमा बागरी को टिकट दिया है। कांग्रेस ने कल्पना वर्मा को चुना है, जो 2018 में जुगल किशोर बागरी से 18 हजार वोट से हारी थी। कल्पना एक मजबूत उम्मीदवार हैं और हारने के बाद भी इलाके में सक्रिय रही है। 

इस उपचुनावों का हाइलाइट रहने वाली है खंडवा लोकसभा सीट। यहां दोनों पार्टियां गुटबाजी का सामना कर रही है। भाजपा ने वरिष्ठ नेता नंदकुमार सिंह चौहान के निधन से रिक्त हुई सीट पर ज्ञानेश्वर पाटिल को टिकट दिया है। पार्टी में पाटिल कोई मजबूत नाम नहीं है। चौहान के बड़े बेटे हर्षवर्धन चौहान और पूर्व मंत्री अर्चना चिटनिस भी टिकट के दावेदार थे।  

इसी तरह कांग्रेस के अरुण यादव को टिकट मिलने की उम्मीद थी। यादव पहले भी नंदकुमार सिंह चौहान को हरा चुके हैं। उनका इस विधानसभा क्षेत्र में प्रभाव है। यादव केंद्रीय मंत्री भी रहे हैं। हालांकि, आखिरी क्षणों में यादव ने उम्मीदवारी से इनकार किया क्योंकि कांग्रेस के प्रादेशिक नेताओं ने उन्हें अलग-थलग कर दिया था। पार्टी ने आखिर राजनारायण पुरनी को टिकट दिया, जो खंडवा से तीन बार के विधायक हैं। ठाकुर को दिग्विजय सिंह का करीबी माना जाता है। 

मुद्दे क्या हैं चुनाव में? 
कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के नेतृत्व में भाजपा पर महंगाई, बिजली-खाद संकट के साथ ही अन्य मुद्दों को हाइलाइट किया है। कमलनाथ ने तो शिवराज के 17 साल के शासन की कमियां गिनाई। फिर बेरोजगारी, कुपोषण जैसे मुद्दे भी उठाए। 

वहीं, इन चुनावों में भाजपा की सक्रियता भी देखते ही बनी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हर क्षेत्र में एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया। भाजपा ने 12 मंत्रियों और 40 विधायकों को फुलटाइम चुनावी ड्यूटी में लगाए रखा। ऐसा लगा जैसे पार्टी उपचुनाव नहीं, बल्कि विधानसभा चुनाव लड़ रही है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 40 सभाओं को संबोधित किया। पांच रातें तो उन्होंने निर्वाचन क्षेत्रों में ही बिताईं। कभी किसी आदिवासी के घर भोजन किया तो किसी गरीब के घर जाकर ठहरे। सुबह शेव करने वाला वीडियो भी खूब वायरल हुआ। समय कम बचा था तो पुनासा डैम पर खड़े-खड़े ही एक सभा को संबोधित किया। 

शिवराज ने आखिर इतनी ताकत क्यों लगाई?
साफ है कि इन उपचुनावों को शिवराज सिंह चौहान का लिटमस टेस्ट समझा जा रहा है। भाजपा ने हाल ही में उत्तराखंड, गुजरात और कर्नाटक में मुख्यमंत्री बदले हैं। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री को बदलने की अटकलें भी लंबे अरसे से लग रही थी। ऐसे में शिवराज के नेतृत्व में अगर पार्टी अपनी सीटें बढ़ा पाती हैं तो यह उनकी कुर्सी पर उनकी पकड़ को मजबूत करेगी।  
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