नार्वे के ओस्लो में प्रवासी लेखक सुरेशचंद्र शुक्ल ‘शरद आलोक’ ने गोस्वामी तुलसीदासजी द्वारा रचित श्रीराम स्तुति ‘श्री रामचंद्र कृपालु भजुमन हरण भव भय दारुणं’ का अनुवाद नार्वेजियन भाषा में किया। साथ ही श्रीराम स्तुति सुनाई। सुरेशचंद्र शुक्ल ‘शरद आलोक’ ने कहा कि उन्होंने राम के उदार चरित्र को सेतु बनाकर दो अलग परिवेश, संस्कृति व भाषाओं को जोड़ा।
अयोध्या में पीएम नरेंद्र मोदी ने रामलला मंदिर का नींव पूजन किया और हम लोगों ने ओस्लो में इसका जश्न मनाया। इस दौरान बाल कांड में प्रसिद्ध वंदना ‘श्रीराम चंद्र कृपालु भजुमन हरण भव भय दारुणम’ का मूल पाठ और नार्वेजियन भाषा में अनुवादित पाठ उन्होंने खुद प्रस्तुत किया।
इसका आनंद कार्यक्रम में उपस्थित हिंदी एवं नार्वेजियन भाषी समुदाय के लोगों ने लिया। इस अवसर पर सुरेशचंद्र शुक्ल ने कामना की कि अयोध्या में निर्मित होने वाला राम मंदिर सर्वधर्म समभाव और विश्व में मानव के लिए प्रेरणा का केंद्र बनेगा। सदियों पहले रोमावंशी भारत से यूरोप पहुंचे थे, जिनमें अनेक लोग अपने को लवकुश परंपरा से जोड़ते हैं।