लखनऊ के सरोजनीनगर पीएचसी में एक नर्स की वजह से नवजात की जान बच गई। बताया गया कि डिलीवरी हुई तो नवजात की धड़कन चल रही थी, लेकिन सांस नहीं थी। नर्स ने शिशु को मुंह से करीब 10 मिनट तक सांस देना शुरू किया। नवजात ने तब रोना शुरू किया और सांस चलने लगी। तब जाकर नवजात की जान बची।
अमौसी निवासी महिला (24) को प्रसव पीड़ा होने पर परिजन पीएचसी सरोजनी नगर लेकर पहुंचे। वहां पर एनएचएम से तैनात नर्स स्वाति सक्सेना, सुनीता और वार्ड आया संध्या कश्यप ने डॉक्टर के साथ गर्भवती का प्रसव कराया। स्वाति के मुताबिक, अल्ट्रासाउंड में नवजात के गले में फंदा (कॉर्ड) नहीं दिख रहा था, लेकिन डिलीवरी शुरू हुई तो गले में फंदा टाइट था।
मुंह में गंदा पानी चला गया था। जब डिलीवरी हुई तो नवजात की धड़कन चल रही थी, लेकिन सांस नहीं थी। नर्स स्वाति ने सूझबूझ से काम करते करते हुए शिशु को मुंह से करीब 10 मिनट तक सांस देना शुरू किया। नवजात ने तब रोना शुरू किया और सांस चलने लगी। इससे नवजात की जान बची। उसके बाद महिला और बच्चे को डॉक्टर की सलाह पर दूसरे बड़े अस्पताल में रेफर कर दिया गया।