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UP: कहीं बिना बोए तो कहीं रकबा बढ़ा कर ले लिया बीमा का लाभ; यूपी में पकड़ में आए आठ हजार मामले; अब होगी वसूली

Tue, 17 Oct 2023 07:59 AM IST
शाहरुख खान चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ

सार

प्रदेश में फसल बीमा का दायरा लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2022-23 में खरीफ व रबी फसल को मिलाकर 41.47 लाख किसानों का बीमा हुआ। अब बीमा लेने वाले सभी किसानों की नए सिरे से जांच की जा रही है। गलत तरीके से लाभ लेने वालों से वसूली होगी। वहीं, कृषि विभाग इस तरह की हेराफेरी रोकने के लिए रणनीति भी बना रहा है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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प्रदेश के कई जिलों में किसानों ने फसल बीमा योजना में हेराफेरी की है। कहीं बिना फसल बोए तो कहीं रकबा बढ़ाकर बीमा का लाभ ले लिया। कुछ जगहों तो एक ही फसल का दो-दो बैंकों से बीमा राशि लिया गया है। अब तक इस तरह के करीब आठ हजार मामले सामने आए हैं। 
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अब बीमा लेने वाले सभी किसानों की नए सिरे से जांच की जा रही है। गलत तरीके से लाभ लेने वालों से वसूली होगी। वहीं, कृषि विभाग इस तरह की हेराफेरी रोकने के लिए रणनीति भी बना रहा है।

प्रदेश में फसल बीमा का दायरा लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2022-23 में खरीफ व रबी फसल को मिलाकर 41.47 लाख किसानों का बीमा हुआ। करीब 28.95 लाख हेक्टेयर खेत और 16009.19 करोड़ रुपये का बीमा किया गया। इसमें किसानों ने 283.58 करोड़, राज्य सरकार ने 612.12 करोड़ और केंद्र ने 610.61 करोड़ रुपये का प्रीमियम दिया। 
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विभाग ने 10.67 लाख किसानों को 795.96 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति बांटीं। सूत्रों का कहना है कि बीमा क्लेम के भुगतान के दौरान करीब आठ हजार मामले में हेराफेरी का पता चला है। कुछ किसानों ने दो से तीन बार क्लेम ले लिया है तो कुछ ने क्लेम लेने की कोशिश की है। 

ऐसे मामलों को अलग कर दिया गया है। जिन किसानों ने गलत तरीके से क्लेम लिया है, उनसे वसूली होगी। विभागीय अधिकारी ने बताया कि कृषि सांख्यिकी विभाग जिलेवार तथ्यात्मक रिपोर्ट मंगवा रहा है। उसकी पड़ताल हो रही है। दो से तीन बार क्लेम मांगने वाले ज्यादातर केस बुंदेलखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हैं। 
 

पड़ताल में विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध मिली है। ऐसे कार्मिकों को चिह्नित कर उनके खिलाफ कार्रवाई की भी तैयारी है। क्योंकि इन्होंने किसानों को गलत तरीके से दस्तावेज उपलब्ध कराए हैं।

हेराफेरी रोकने के लिए विभाग बना रहा रणनीति
विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दो से तीन बार बीमा क्लेम के केस सामने आने के बाद हेराफेरी रोकने के लिए विभाग रणनीति बना रहा है। इसके तहत सभी किसानों के गाटा और खाता संख्या को एक पोर्टल से जोड़ने की तैयारी है। इससे दोहराव होते ही मामले पकड़ में आ जाएंगे।

केस 1 :
महोबा के कई किसानों ने दो बैंकों से किसान क्रेडिट कार्ड बनवा लिया। उन्होंने एक ही फसल की क्षतिपूर्ति दोनों बैंकों से ले ली है। इसी तरह एक ही खेत पर किसान और बंटाईदार दोनों के क्रेडिट कार्ड बनवाने का मामला भी सामने आया है। विभाग ने पूरे जिले के किसानों की जांच करा रहा है।

केस 2 :
मथुरा में एक किसान ने दो बीघे में सरसों की बोआई की। एक बार बीमा राशि लेने के बाद उसने तीन बीघे अतिरिक्त फसल बोआई होने का दावा कर दिया। मामला संदिग्ध होने पर जांच हुई। पता चला कि सरसों की बोआई हुई ही नहीं है। खतौनी व अन्य दस्तावेजों में हेराफेरी की गई है।
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हर मामले की जांच की जा रही है। गलत भुगतान लेने वालों से वसूली की जाएगी। जिन लोगों ने दोबारा क्लेम लेने की कोशिश की है, उन्हें चेतावनी दी जाएगी। ऐसे मामलों से निपटने के लिए पुख्ता रणनीति बनाई जा रही है। -डॉ. देवेश चतुर्वेदी, अपर मुख्य सचिव कृषि
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