विज्ञापन

Motivational Poetry: वर्जिनिया वुल्फ़ की कविता- चाहे कुछ भी हो जाए, पर ज़िन्दा रहो

काव्य डेस्क

Vishwa Kavya
विज्ञापन
                                    
                                                                        
                            चाहे कुछ भी हो जाए, पर ज़िन्दा रहो ।
        
                                                    
                            
मौत आने से पहले मत मरो।
ख़ुद को खोने मत दो, उम्मीद डुबोने मत दो,
अपनी दिशा को गुम होने मत दो।

ज़िन्दा रहो,
ख़ुद अपने आप के साथ, अपने शरीर की हर थाप के साथ,
अपनी त्वचा के हर छाप के साथ।

ज़िन्दा रहो,
पढ़ो-लिखो, कुछ नया सीखो, कुछ नया सोचो,
कुछ नया जाँचो और बाँचो,
कुछ नया संजोओ और साधो, सृजन करो नया, मन को थोड़ा बाँधो,
सपने देखो नए नए, जीवन से दुख-दर्द गए ।

ज़िन्दा रहो,
ज़िन्दा रहो बाहर, भीतर भी रहो ज़िन्दा,
यह दुनिया रंग-बिरंगी है
इसके चितकबरे रंगों से ख़ुद को भरो, बिन्दास !
शान्ति से भरो मन अपना, देखो उम्मीद भरा सपना ।

ज़िन्दा रहो ख़ुश रहो ।
जीवन से भरे मानुष रहो
बरबाद नहीं करना जीवन
सुख हैं उसका संजीवन
निरन्तर बना रहे जीवन ।

अँग्रेज़ी से अनुवाद : अनिल जनविजय

एक वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Ankit Kumar

10736 कविताएं

View Profile