विज्ञापन

Social Media Poetry: या समर में भाग लो या फिर समर से भाग जाओ !

काव्य डेस्क

Viral Kavya
विज्ञापन
                                    
                                                                        
                            पक्ष चुनने का समय है
        
                                                    
                            
सो रहे हो? जाग जाओ!
या समर में भाग लो या फिर समर से भाग जाओ!

यदि तटस्थी भाव लेकर 
तुम  कहीं अटके हुये हो
तो दया के पात्र हो तुम 
तुम अभी भटके हुये हो 

नाचता सिर पर प्रलय है
सो रहे हो? जाग जाओ!
या समर में भाग लो या फिर समर से भाग जाओ!

सभ्यता  की इस नदी में 
आ गये घड़ियाल कितने
उम्र    बीतेगी    तुम्हारी 
तुम बुनोगे जाल कितने

हर दिशा में मौन भय है
सो रहे हो? जाग जाओ! 
या समर में भाग लो या फिर समर से भाग जाओ!

कल  समय   के प्रश्न भी 
होंगे तुम्हारी भूमिका पर 
दे सकोगे क्या भला उत्तर
उसे  तुम   मौन    होकर 

इसलिये अंतिम विनय है 
सो रहे हो? जाग जाओ! 
या समर में भाग लो या फिर समर से भाग जाओ!

साभार: ज्ञान प्रकाश आकुल की फेसबुक वाल से 

हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें।


 
3 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all